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सामूहिक हत्याकांड के दोषी को उम्रकैद

Wed, 12 Apr 2017 11:56 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला हमीरपुर
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न्यायालय से बाहर निकलता आरोपी रूक्कू। - फोटो : Amar ujala
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मुख्यालय के व्यस्ततम सुभाष बाजार में बीते 20 वर्ष पूर्व हुए बहुचर्चित सामूहिक हत्याकांड के मामले में सदर विधायक के चालक/प्राइवेट गनर को दोषी पाए जाने पर बुधवार को जनपद न्यायाधीश बीराम ने उसे आजीवन कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि मामले के मुख्य आरोपी विधायक अशोक सिंह चंदेल समेत 10 लोगों को न्यायालय पहले ही बरी कर चुका है।
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नगर के सुभाष बाजार में 26 जनवरी 1997 को सामूहिक जघन्य हत्याकांड हुआ था। जिसमें एक अबोध बालक सहित पांच लोगों की मौत हुई थी। जिसमें राजीव शुक्ला के भाई राजेश शुक्ला, राकेश शुक्ला व भतीजा अंबुज व दो अन्य वेदनायक व श्रीकांत पांडेय शामिल थे। जबकि राजीव शुक्ला, भतीजा चंदन व उनका पुत्र बिपुल सहित पांच लोग घायल हुए थे।

इस मामले में राजीव शुक्ला ने विधायक अशोक सिंह चंदेल सहित 12 लोगों को नामजद किया था। जिसमें विधायक का सरकारी गनर रामबाबू में शामिल था। विवेचना के बाद पुलिस ने सरकारी गनर का नाम आरोप पत्र में दाखिल नहीं किया था। जिसमें पूर्व में हुई मुकदमें की सुनवाई में न्यायालय ने मुख्य आरोपी अशोक सिंह चंदेल समेत 10 लोगों को बरी कर दिया था।
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फरार ग्यारहवां आरोपी रूक्कू निवासी खालेपुरा फरार चल रहा था। जिसने 12 मई 2003 को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। तब से यह आरोपी कारागार में निरुद्ध है। मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद जनपद न्यायाधीश बीराम ने आरोपी को को दोषी पाए जाने पर उसे आजीवन कारावास व नौ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

मुस्तैद रही पुलिस
आरोपी रूक्कू को न्यायालय द्वारा मंगलवार को दोषी कराए दिए जाने के बाद बुधवार को न्यायालय परिसर में काफी संख्या में पुलिस फोर्स लगाया गया। सुबह से ही एलआईयू, कोतवाली, सुमेरपुर व कुरारा थाने का फोर्स तैनात रहा।

सरकार ने 2003 में की थी अधिवक्ता की नियुक्ति
मामले की सरकार पक्ष से पैरवी कर रहे अधिवक्ता फूलसिंह कुशवाहा ने बताया कि सरकार ने उन्हें मुकदमे की पैरवी के लिए वर्ष 2003 में नियुक्त किया था। तब से वह इस मुकदमे की निरंतर पैरवी कर रहे थे। बताया कि सरकारी अधिवक्ता द्वारा मुकदमे की पैरवी करने से मना करने पर सरकार ने उनकी नियुक्ति की थी। जिसका सरकार उन्हें प्रति सुनवाई एक हजार रुपया भी दे रही है।

राज्यपाल ने न्यायिक अधिकारी को बर्खास्त करने की दी थी स्वीकृति
नगर में 20 साल पूर्व हुए सामूहिक हत्याकंाड के मामले में अदालत ने मुख्य आरोपी पूर्व विधायक अशोक चंदेल सहित 10 लोगों को बरी कर दिया था। जिस पर वादी राजीव शुक्ल ने इस निर्णय की शिकायत उच्च न्यायालय में की। इस प्रकरण में हुई जांच के बाद बरी करने वाले न्यायिक अधिकारी अश्विनी कुमार को उच्च न्यायालय की संस्तुति पर राज्यपाल ने बर्खास्त करने की स्वीकृति प्रदान की थी। लंबे समय से इस प्रकरण की लड़ाई रहे वादी पक्ष ने इस कार्रवाई को बड़ी जीत माना। इस मामले में आरोपियों को जमानत दिए जाने के आरोप में पहले भी एक न्यायिक अधिकारी बर्खास्त किए जा चुके हैं।

राजीव शुक्ला ने बताया कि  इस मामले में कई आरोपी जेल गए। जबकि पूर्व वाले जज के खिलाफ शिकायत की। इस पर उच्च न्यायालय ने न्यायिक अधिकारी आरबी लाल को निलंबित कर दिया। उसके बाद जांच रिपोर्ट आने पर उन्हें बर्खास्त कर दिया। जमानत निरस्त होने पर आरोपी विधायक कई साल जेल में निरूद्ध रहे थे। इधर 15 जुलाई 2007 को तत्कालीन न्यायिक अधिकारी अश्विनी कुमार ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया। इस पर वादी राजीव शुक्ला ने उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय में निर्णय के खिलाफ अपील की।

साथ ही न्यायिक अधिकारी पर मनमानी करते हुए फैसला दिए जाने का आरोप लगाया। पीड़ित की शिकायत पर उच्च न्यायालय ने विजिलेंस इंक्वायरी व ज्यूूडिशियल इंक्वायरी कराई। जिसमें न्यायिक अधिकारी अश्विनी कुमार को मुकदमे में गलत तरीके से आरोपियों को बरी करना अनुचित पाया गया। राजीव शुक्ला ने बताया कि जांच में न्यायिक अधिकारी पर जान बूझकर कपट व कदाचार से ऐसा निर्णय देने का आरोप सिद्ध हुआ।

जांच अधिकारी की आख्या व उच्च न्यायालय की संस्तुति पर राज्यपाल के आदेश में न्यायिक अधिकारी को बर्खास्त करने की स्वीकृति प्रदान की गई थी। न्यायिक अधिकारी के खिलाफ आए इस फैसले से वादी पक्ष ने इसे अपनी बड़ी जीत बताई है। उधर, बुधवार को आए फैसले के बाद वादी ने बताया कि यह उनकी दूसरी जीत है। कहा कि उच्च न्यायालय में चल रहे मुकदमे में और बल मिलेगा।
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