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लक्ष्मण-परशुराम संवाद देख दर्शक रोमांचित

Thu, 20 Oct 2016 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
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राठ कस्बे में रामलीला मंच पर धनुष भंग के बाद लक्ष्मण से संवाद करते परशुराम। - फोटो : amarujala
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कस्बे में चल रही रामलीला के पांचवें दिन राम-सीता विवाह और परशुराम लक्ष्मण संवाद का मंचन हुआ। सीता स्वयंवर के बाद हुए राम विवाह पर जमकर आतिशबाजी हुई। दर्शकों ने खूब आनंद लिया। परशुराम लक्ष्मण संवाद में एक दूसरे के ऊपर शब्दों के तीखे प्रहारों से दर्शकों ने खूब आनंद लिया।
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बुधवार की रात मंचन के दौरान मिथलापुरी के राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर रचाया। स्वयंवर के दौरान जनक ने कहा शिव धनुष को उठाकर जो बलशाली राजा प्रत्यंचा चढ़ायेगा मेरी बेटी उसके गले में वर माला डाल देगी। राजा महाराजा उस शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाना तो दूर उसे हिला भी नहीं सके।

तो राजा दशरथ की आंखों से आंसुओं की धार बहने लगी। स्वयंवर में गुरू विश्वामित्र के साथ बैठे लक्ष्मण ने राजा जनक से कहा कि हे, राजन जिस सभा में शूरवीर क्षत्रीय बैठे हों, वहां ऐसी बातें करना आपको शोभा नहीं देता। गुरु विश्वामित्र के आदेश पर भगवान राम धनुष तोड़ते हैं। इसके बाद सीता ने राम के गले में वर माला डाली।
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इस मौके पर पूरे पंडाल में राम-सीता की जय-जयकार होने लगी। राम विवाह के मौके पर जमकर आतिशबाजी भी हुई। धनुष भंजन की गर्जना सुनकर मंच पर परशुराम आये तो उनका आक्रोश देख स्वयंवर में मौजूद राजा महाराज कांप उठे। परशुराम ने आक्रोशित मुद्रा में राजा जनक से शिव धनुष तोड़ने वाले से पूंछा। इसके बाद लक्ष्मन परशुराम संवाद में लक्ष्मण द्वारा तीखे अंदाज में किए गए संवादों की प्रस्तुति दर्शकों द्वारा खूब सराही गई।
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