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कानपुर-सागर हाईवे : उजड़ रहे परिवार... सुरक्षा में नहीं सुधार

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अमित कुमार शुक्ल सरीला (हमीरपुर)। कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-34) पर बुधवार को कुंडौरा गांव के पास रोडवेज बस और डीजल टैंकर की आमने-सामने भिड़ंत में तीन लोगों की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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यह पहला हादसा नहीं है। बीते चार माह में इसी हाईवे पर बारातियों, श्रद्धालुओं और भारी वाहनों से जुड़े कई हादसों में दर्जनों परिवार तबाह हो चुके हैं। हादसों के बाद लोग सड़क पर उतरे, कलक्ट्रेट का घेराव किया, डिवाइडर और चौड़ीकरण की मांग उठी, प्रदर्शनकारियों पर प्राथमिकी दर्ज हुई, सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में कई निर्णय भी लिए गए लेकिन हालात नहीं बदले। नतीजा यह रहा कि एनएच-34 पर मौत का सिलसिला जारी है।
कानपुर-सागर हाईवे पर हाल के बड़े हादसों पर गौर करे तो एक समान पैटर्न सामने आता है। अधिकांश दुर्घटनाओं में वाहनों की आमने-सामने की टक्कर या ओवरटेकिंग के दौरान नियंत्रण खोने की स्थिति बनी। कुंडौरा हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट में भी यही बात सामने आई है। परियोजना निदेशक एनएचएआई पंकज यादव के अनुसार प्रारंभिक जानकारी में ओवरटेकिंग के दौरान आमने-सामने की भिड़ंत की बात सामने आई है। बरातियों की मौत के बाद क्षेत्र में सड़क सुरक्षा की मांग तेज हो गई थी। लोगों ने डिवाइडर, चौड़ीकरण, रंबल स्ट्रिप, बेहतर साइनेज और ब्लैक स्पॉट पर स्थायी सुरक्षा उपायों की मांग को लेकर कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। भाजपा पदाधिकारी, सामाजिक संगठन और स्थानीय नागरिक भी आंदोलन में शामिल हुए। ज्ञापन को लेकर हुए विवाद के बाद प्रदर्शनकारियों पर प्राथमिकी भी दर्ज किया गया जिसकी विवेचना आज भी जारी है।
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इधर, एआरटीओ प्रवर्तन प्रवीण कुमार द्वारा उपलब्ध कराए गए सड़क सुरक्षा समिति के अभिलेख बताते हैं कि एनएच-34 पर नो-ओवरटेकिंग बोर्ड, साइनेज, रंबल स्ट्रिप, कैट्स-आई, शेवरॉन बोर्ड, डेलिनेटर, क्रैश बैरियर और प्रकाश व्यवस्था जैसे कई सुरक्षा उपायों पर काम किया गया या प्रगति पर है। इसके बावजूद दुर्घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रहीं।
परिवहन विभाग के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता बताते हैं। 2025 में जिले में 389 सड़क दुर्घटनाओं में 224 लोगों की मौत हुई, जबकि 349 लोग घायल हुए। 2026 में जुलाई तक 179 सड़क हादसों में 111 लोगों की जान जा चुकी है और 153 लोग घायल हुए हैं। अगस्त की शुरुआत में ही कुंडौरा हादसे ने इन आंकड़ों में और इजाफा कर दिया। (संवाद)
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