हमीरपुर। बिवांर थानाक्षेत्र के सायर गांव में पंद्रह साल छह माह पूर्व अनुसूचित जाति के दंपती से हुई मारपीट के मामले में विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट रनवीर सिंह ने फैसला सुनाया है। उन्होंने लल्लू, उसकी पत्नी प्रेमरानी व बेटे रामचरन को दोषी मान तीन वर्ष छह माह का कारावास सुनाया है। साथ ही प्रत्येक पर सात हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
सायर गांव निवासी ने चार अप्रैल 2010 को मुख्यमंत्री को पत्र भेज न्याय की गुहार लगाई। उसने बताया कि नौ फरवरी 2010 की सुबह करीब आठ बजे वह अपनी परचून की छोटी सी दुकान में बैठा था। तभी, दुकान में गांव के लल्लू का करीब नौ वर्षीय भतीजा एक-दो रुपये की खाने की चीज लेने आया। पीछे से उसका करीब दस वर्षीय भाई भूरा वहां आया और छोटे भाई को मारने लगा। उसने बीच बचाव की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। तब उसने थोड़ा कड़ाई से उसे डांटा तब भूरा उसे गाली देते हुए भाग गया। उसने घर जाकर लल्लू से उसकी शिकायत की। लल्लू उसका बेटा रामचरन व उसकी पत्नी प्रेमारानी उससे ईर्ष्या मानते थे। इस पर उन्होंने लाठी डंडों से उसे पीटा। उसे बचाने आई उसकी पत्नी को भी मारा पीटा और जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित किया। थानाध्यक्ष, सीओ समेत अन्य उच्चाधिकारियों ने उसकी फरियाद नहीं सुनी और रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इसके बाद तत्कालीन बसपा जिलाध्यक्ष के हस्ताक्षेप के बाद बिवांर थाने में रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने चार्जसीट न्यायालय में पेश की। मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी मान सजा सुनाई।