हमीरपुर। करीब दो साल पहले कोर्ट मैरिज कर दो साथियों के साथ तमंचा सटाकर युवती से सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले में मुख्य आरोपी की जमानत अर्जी अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम ने खारिज कर दी।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश कुमार तिवारी ने बताया कि बिवांर थानाक्षेत्र के एक गांव निवासी युवती ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उसका एक मकान मौदहा कस्बे के फत्तेपुर मोहल्ले में है। उसकी मोबाइल के जरिए मौदाहा कस्बा निवासी वारिस अली से जान पहचान हो गई। आरोपी उसे बहला फुसलाकर लखनऊ ले गया। वहां 23 जनवरी 2020 को निकाह कर लिया। वारिस अली के साथी हाल डीएस 525 सेक्टर डीएलडीए कालोनी कानपुर रोड लखनऊ साथी निजामुद्दीन व मांचा निवासी मोहम्मद आरिफ अब्बास निकाह के गवाह बने। आरोपियों की पीड़ित युवती की तरफ से जान को खतरा बताकर सुरक्षा के लिए उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ बेंच में एक प्रार्थना पत्र भी दिलवा दिया। उसके बाद वारिस ने उसे अपने घर ले जाने से मना कर दिया। कहा कि सही वक्त आने पर वह अपने घर ले जाएगा। पीड़ित युवती ने बताया नौ फरवरी 2020 को वह मौदहा स्थित अपने मकान में अकेली थी।
उसी रोज रात आठ बजे वारिस अली साथी निजामुद्दीन व मोहम्मद आरिफ से साथ उसके घर आ गया। उसने आरोपी को पति मानकर अंदर आने दिया, लेकिन आरोपी व उसके साथियों ने दरवाजा बंद कर उसके तमंचा सटा दिया। उसके बाद जान से मारने की धमकी देकर तीनों ने दुष्कर्म किया। उसके आपत्तिजनक वीडियो व फोटो भी बनाए। मामले में पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म व अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। तब से सभी आरोपी जेल में निरुद्ध हैं॥ मुख्य आरोपी वारिस अली की तरफ से अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम की कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की गई। न्यायाधीश गीतांजल ने बचाव व सरकारी अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद मंगलवार को मुख्य आरोपी वारिस अली की जमानत अर्जी खारिज कर दी।