हमीरपुर। जिले में मौदहा बांध को 169.80 करोड़ की धनराशि से हाईटेक करने के लिए सरकार की पांच सदस्यीय टीम ने केंद्रीय बांध सुरक्षा के निदेशक के नेतृत्व में निरीक्षण किया। टीम में शामिल डैम के डिजाइन विशेषज्ञ व भूगर्भ जल शास्त्री ने बांध को भविष्य के लिए सुरक्षित करने के लिए कई घंटे तक मौके पर जांच किया।
जनपद के सूखाग्रस्त इस क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 1976-77 में मुस्करा क्षेत्र के बसौठ गांव के पास मौदहा बांध के निर्माण की आधारशिला रखी गई थी। 117 करोड़ की लागत से इस बांध का निर्माण पूर्ण होने के बाद 17 जून 1999 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने इसका लोकार्पण किया था। इस बांध का नाम भी स्वामी ब्रह्मानंद रखा गया। 3.48 किमी लंबे और 22 मीटर ऊंचा मिट्टी का बांध, बेतवा नदी की सहायक नदी विरमा पर बनाया गया। इतना ही नहीं 200 मिलियन क्यूसिक मीटर (7 टीएमसी) क्षमता का जलाशय भी बनाया गया है। यह मौदहा बांध परियोजना किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। इसकी क्षमता चार लाख क्यूसिक है। परियोजना से 98 किमी मुख्य नहरें हैं। 456 किमी बांध की वितरण प्रणाली है। जिससे 41.117 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि से हर साल 29.24 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का पानी मिलता है। बांध परियोजना से 28 लाख घन मीटर पानी भी पीने के लिए मिलता है। हमीरपुर के साथ महोबा जनपद के करीब डेढ़ दर्जन गांवों के किसानों की फसलों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। डैम के अधिशासी अभियंता एके निरंजन ने बताया कि सरकार की पांच सदस्यीय टीम ने बांध सुरक्षा संबंधी मौके पर निरीक्षण किया है। बांध के स्पिलवे में पानी आने की कमी को कैसे दूर किया जाए। इसे लेकर ही टीम ने स्थलीय जायजा लिया। टीम के सुझाव और रिपोर्ट के बाद डैम को हाईटेक बनाने के कार्य शुरू होंगे। साथ ही पर्यटन की दृष्टि से पार्क बनेगा और डैम में नौका विहार की सुविधाएं भी की जाएंगी।
अधिशासी अभियंता एके निरंजन ने बताया कि मोदी सरकार में बांध का कायाकल्प करने के लिए एक बड़ी कार्य योजना तैयार कर सरकार को भेजी गई थी। डीआरआईपी (बांध पुर्नस्थापन प्रोग्राम) के तहत यह मौदहा डैम को सरकार ने सम्मिलित किया है। विश्व बैंक के माध्यम से 169.80 करोड़ की कार्य योजना पर मोहर लग चुकी है। सरकार के निर्देश पर पांच सदस्यीय टीम के केंद्रीय बाढ़ सुरक्षा के विशेषज्ञ एस मसूद हुसैन, भूगर्भ जल शास्त्री राकेश कुमार गुप्ता, बांध के डिजाइन विशेषज्ञ बृजेश त्रिपाठी, भूवैज्ञानिक दिनेशचंद्र त्रिपाठी व बांध सुरक्षा के डायरेक्टर श्याम चौबे ने मौदहा बांध का बारीकी से निरीक्षण किया है। टीम के विशेषज्ञों ने डैम को हाईटेक बनाने के लिए तकनीकी रूप से भी स्थलीय जांच की है।
मौदहा बांध के साथ 11 दर्रों का स्पिलवे निर्मित है जिसकी क्षमता 4.0 लाख क्यूसिक है। बाढ़ के समय फालतू पानी इसी स्पिलवे से बाहर पास होता है। स्पिलवे (गैलरी) में डैम का पानी आना भविष्य के लिए खतरे की घंटी है इसीलिए भारत सरकार से आई तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने स्पिलवे का बारीकी से निरीक्षण किया। मौदहा बांध परियोजना से मुख्य नहरें व शाखाओं के अलावा 456 किमी बांध की वितरण प्रणाली का भी टीम ने जायजा लिया। तकनीकी कमियां को दूर कर डैम को हाईटेक किया जाएगा। जिससे भविष्य में कोई दिक्कतें न पैदा हो सके। बताया कि डैम की तकनीकी निरीक्षण के बाद टीम सरकार को अपनी रिपोर्ट देगी। जिसके बाद परियोजना को हरी झंडी मिलते ही कार्य शुरू होंगे।