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खूनी लहरें, खामोश चीखें: तैरना जानती थी मां, बेटे को बचाने में डूबी, 22 घंटे में मिले छह शव, ऐसा था नाव हादसा

Fri, 08 May 2026 06:32 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर

सार

Hamirpur News: हमीरपुर में नाव पलटने के बाद अपने पांच साल के बेटे को बचाने की कोशिश में मां बृजरानी की भी डूबने से मौत हो गई। तैरना जानने के बाद भी उन्होंने बेटे के लिए बलिदान दे दिया, जिससे पूरे गांव में मातम पसरा है।

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Hamirpur Boat Accident - फोटो : amar ujala

हमीरपुर यमुना की लहरों में मां की ममता डूब गई। तैरना जानते हुए भी बृजरानी ने स्वयं को बचाने का प्रयास नहीं किया। वह अपने पांच साल के बेटे को ढूंढते-ढूंढते डूब गई। गुरुवार को दोनों के शव नदी में अलग-अलग स्थानों पर मिले। ग्रामीणों और परिजनों की आंखें नम रहीं। पूरे गांव में शोक की लहर है।
मनकी गांव निवासी बृजरानी रिश्तेदारी में शादी समारोह में शामिल होने घाटमपुर से आई थी। उनके परिवार में दो बेटियां अनामिका और अनन्या हैं। परिजन ने बताया कि वह तैरना जानती थीं। नाव पलटने के बाद वह बाहर आ सकती थीं, लेकिन पांच वर्षीय बेटे लव्यांश को डूबते देख उसे बचाने लगीं।

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Hamirpur Boat Accident - फोटो : amar ujala

मां और बेटे के शव अलग-अलग क्षेत्र में मिले
विष्णु ने बताया कि वह बेटे को बचाने के लिए गहरे पानी में चली गईं जहां तेज बहाव में काफी देर तक संघर्ष करने के बाद वह डूब गईं। रेस्क्यू टीम ने सभी छह शव बाहर निकाले। मां और बेटे के शव अलग-अलग क्षेत्र में मिले। परिजन का कहना है कि अगर समय रहते मदद मिल जाती, तो शायद मां-बेटे की जान बच सकती थी।

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Hamirpur Boat Accident - फोटो : amar ujala

नाव में तीन लोग जानते थे तैरना
परिजन गया प्रसाद का कहना है कि नाव में कुल नौ लोग सवार थे। इनमें सिर्फ विष्णु, गुलाब और बृजरानी को ही तैरना आता था। हादसे के दौरान विष्णु ने किसी तरह रिंकू और पारुल को बाहर निकाला जबकि गुलाब ने भी बचाव का प्रयास किया। बाकी बच्चे तैरना नहीं जानते थे।

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Hamirpur Boat Accident - फोटो : amar ujala

घर का इकलौता चिराग था लव्यांश
ग्रामीणों के अनुसार लव्यांश परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनें अनामिका और अनन्या हैं। बेटे और मां की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है।

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Hamirpur Boat Accident - फोटो : amar ujala

डीजे की आवाज में दब गईं चीखें
ग्रामीण देशराज ने बताया कि करीब 20 से 30 मिनट तक नदी किनारे अफरा-तफरी का माहौल रहा। अंधेरा और तेज बहाव होने से बचाव कार्य में काफी परेशानी हुई। सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण नदी किनारे पहुंचे। करीब 8:30 बजे पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों और कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई।

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रातभर सर्च अभियान चलाया
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फ्लड पीएसी और स्थानीय गोताखोरों ने रातभर सर्च अभियान चलाया। लोगों का कहना है कि अगर घटना के समय शोरगुल जल्दी सुनाई दे जाता तो शायद कुछ और लोगों की जान बचाई जा सकती थी। घटना के समय दूसरी शादी का डीजे बजने से चीख पुकार दब गई।

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Hamirpur Boat Accident - फोटो : amar ujala

धीरू बना फरिश्ता
हादसे के समय नाव चालक विष्णु दो बच्चों को नदी से बचाकर किनारे तक लाया और वह खुद थक गया। इसी दौरान उस पार मौजूद धीरू (14) ने बहादुरी दिखाते हुए दो किशोरों को डूबने से बचाने में मदद की। साथ ही ग्रामीणों के साथ डूब रहे लोगों को बाहर निकालने में जुट गया।

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जाल डालकर चलाया गया सर्च अभियान
पुलिस और गोताखोरों ने नदी में कई स्थानों पर जाल डलवाए। एनडीआरएफ की चार, एसडीआरएफ की दो और फ्लड पीएसी की एक टीम ने करीब 22 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया।

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यमुना में समाए सभी छह लोगों के शव मिले
थाना क्षेत्र कुरारा के भौली गांव के मजरा कोतूपुर पटिया के सामने बह रही यमुना में मंगलवार देर शाम नाव पलटने से नदी में समाए छह लोगों के शव गुरुवार को मिल गए। नाव पर नाविक समेत नौ लोग सवार थे। इनमें नाविक विष्णु ने खुद को तो बचाया ही था, डूब रहे दो अन्य लोगों को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया था।

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22 घंटे चला रेस्क्यू अभियान
नदी किनारे खड़े एक साहसी किशोर ने भी नदी में कूदकर विष्णु की मदद की थी। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीमें रातभर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी रहीं। रेस्क्यू अभियान 22 घंटे चला। मरने वालों में मां-बेटा भी हैं। ये सभी लोग यहां एक शादी समारोह में आए थे।

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खरबूजा, तरबूज, खीरा और ककड़ी लेने व खाने गए थे
भौली गांव के मजरा कोतूपुर पटिया निवासी गयाप्रसाद उर्फ राजू की बेटी अंजली की शादी सोमवार को हुई थी। बरात कानपुर देहात के सिरसा, क्योटरा गांव से आई थी। मंगलवार को विदाई के बाद परिवार और रिश्तेदार शाम करीब चार बजे यमुना पार कानपुर देहात सीमा स्थित नदी किनारे बारी पर खरबूजा, तरबूज, खीरा और ककड़ी लेने व खाने गए थे।

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