गुसियारी गांव में कुएं से डिब्बों में पानी भरकर जाते ग्रामीण
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मौदहा (हमीरपुर)। वैसे तो बुंदेलखंड के सभी जिलों में पानी का संकट है लेकिन जिले के गुसियारी गांव में तो पानी खरीदने को लोग मजबूर हैं। पहले तो दस रुपये में बीस लीटर पानी मिल जाता था लेकिन अब उसी के बीस रुपये लिए जा रहे हैं। गांववालों को तो नहाने और कपड़े धोने के लिए भी सोचना पड़ता है। तमाम लोग तो अपने रिश्तेदारों के यहां जाकर नहाते और पकड़े धोते हैं। गांव में पेयजल योजना के तहत पखवारे में एक बार ही पानी मिलता है। पांच हजार की आबादी वाले इस गांव के लिए एक कुआं ही सहारा है।
अगर किसी को पानी की अहमियत जाननी है तो यहां के लोगों से पूछें। मुस्लिम बहुल आबादी के इस गांव के ज्यादातर लोगों के रिश्तेदार मौदहा कस्बे में रहते हैं। गांवनिवासी मुमताज अहमद, कबीर अहमद, इरशाद आदि ने बताया कि गांव में उन लोगों को नहाने और धोने के लिए पानी नहीं मिल रहा है। इसलिए जुमे को वह लोग अपने रिश्तेदारों के यहां मौदहा जाकर नहाते और कपड़े आदि धोते हैं। गांव में बने एक कुएं में पानी भरनेवालों की आमदरफ्त बनी रहती है।
ग्रामीणों को जितनी मशक्कत भोजन बनाने में नहीं होती उससे अधिक पानी लाने में समय बर्बाद करना पड़ता है। गांव के हैसियतदार लोग पानी खरीदकर पी रहे हैं। यही कारण है कि गांव के दो दर्जन से अधिक लोग इस धंधे में लगे हैं। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर युवाओं को पानी ढोने का रोजगार मिल गया है। पिछले साल तक दस रुपये में 20 लीटर पानी भरा डिब्बा मिलता रहा है लेकिन महंगाई को देखते इस धंधे से जुड़े निषाद, प्रजापति व मुस्लिम गरीब परिवारों ने प्रति डिब्बा 20 रुपये कर दिया है।