फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मट्ठे और चने के साग से ग्रामीण चला रहे काम

Sun, 20 Nov 2016 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
विज्ञापन
रोटी खाता छोटू - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विज्ञापन
हमीरपुर। नोटबंदी के 12 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक ग्रामीण क्षेत्राें में जनजीवन पटरी पर नहीं आ सका है। नोट न बदल पाने से जहां दिहाड़ी मजदूरों को गृहस्थी चलाने में खासी दिक्कतें आ रही हैं वहीं गांव में लोगों को बीते कई दिनाें से खाने में सब्जी के दर्शन नहीं हुए हैं। ऐसे में खेतों खड़े चने की फ सल का साग (भाजी) ग्रामीणों को प्रिय सब्जी के रूप में शुमार हो चुका है। गांव में जिन लोगों के घरो में पशु हैं वहां से गरीब मुफ्त में मठ्टा लाकर  गुजारा कर रहे हैं। नोट बदलवाने के लिए लाइन में लगने के बाद भी न बदल पाने की खीझ बैंकाें के ऊपर तो निकालते हैं लेकिन सरकार के फैसले को अच्छा मान रहे हैं। वह सारा दोष बैंकों को दे रहे हैं। पेश है पड़ताल करती एक रिपोर्ट-

सुमेरपुर विकासखंड के उजनेड़ी गांव पहुंचे रिपोर्टर ने बस स्टैंड में बैठकर कराह रहे वृद्ध रघुवर दयाल से नोटबंदी के बारे में पूछा तो उसने बताया कि लाला पौथिया बैंकें गतूं वहीं से लौट के आव हाें लरका कइदीन ते कि बैंक खुला है। काल शनीचरौ का गतू रुपइया न मिल पाएते तो सोचयो कि सैत आज मिल जाय थक गा हाें। घर मा कई दिन ते सालन नहीं बनो। माठा भाजी खात हन। सोचो तो हजार दुई हजार मिल जइहे तो कुछ काम चली। गांव मा कउनव कामौ नहीं करावत सबके सब लरका खाली बइठ हैं। बातचीत करते रिपोर्टर उसके घर पहुंचा तो उसका सबसे छोटा बेटा छोटू खाना खाते मिला। चौके में मात्र रोटियां ही दिखीं। वह एक कटोरी में मट्ठे डाल उसी रोटी खा रहा था। पूछने पर कहने लगा यह क्रम कई दिनों से चल रहा है।    
विज्ञापन
विज्ञापन


पौथिया-कुंडौरा मार्ग पर कुडाैंरा गांव निवासी किसान जयराम खेत के किनारे पेड़ में सिर टिकाए बैठा मिला। पूछने पर बताया कि भइया कइसौ खेत तो तैयार कर लीन है लेकिन अब बवै का कुछु निहाय। चार बीघा खेत है पांच दिन ते रोज छह हजार रुपइया निकारे का पौथिया बैंक के चक्कर लगा चुको लेकिन याको नहीं निकरो। कउनव सुनवाई करे वाला निहाय। खेत के लाने कम से कम सवा क्विंटल बीज और दुई बोरी बवे बाली खाद के जरूरत ही। पलेवा अउर बखराई तो उधार मा हुइगे लेकिन बीज और खाद कउनव के लिगे निहाय नहीं लइलेतू। यही परेशान मा आके बइठ हो का करो कुछु समझा मा नहीं आवत।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें