संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना धरातल पर पूरी नहीं हो पा रही है। मजदूरों को गांव में ही 100 दिन काम देने के दावे हवाहवाई साबित हो रहे हैं। जिन्हें साल में महज 50 दिन ही काम मिल रहा है। ऐसे में मनरेगा मजदूर महानगरों में काम की तलाश में पलायन करने को मजबूर हैं। सरकारी आंकड़े भी यही बता रहे हैं।
जनपद में कुल 2,62,893 लोग मनरेगा में काम करने के लिए पंजीकृत हैं। इनमें 1,89,876 श्रमिक काम कर रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इनमें महज 1,26,123 सक्रिय श्रमिक हैं। इनमें इस वर्ष 69053 श्रमिकों को साल में औसतन 50 दिन काम मिल पाया है जबकि सत्र में हुई तालाबों की खोदाई से काफी मजदूरों को काम मिला था। इसके बाद उन्हें साल में 100 दिन का काम नहीं मिल सका। मनरेगा में एक दिन की दिहाड़ी 230 रुपये निर्धारित है। ऐसे में 50 दिन काम से घर की व्यवस्थाओं काे चलाना भगवान भरोसे है।
यही वजह है कि मनरेगा को लेकर श्रमिकों में निराशा का माहौल पनपा है। जिसके चलते ज्यादातर मजदूर दूसरे शहरों को पलायन कर चुके हैं। गांव में होने वाले विकास में श्रमिकों को रोजगार का सपना फिलहाल अधूरा है। इसे उचित मुकाम देने के लिए ब्लॉक से लेकर ग्राम पंचायत स्तर पर सुध लेने की जरूरत है।
क्या बोले मजदूर
50 दिन ही मिला काम
फोटो 24 एचएएमपी 02 परिचय- सुदामा
सुमेरपुर क्षेत्र के देवगांव निवासी मजदूर सुदामा ने बताया कि इस साल अभी तक 50 दिन काम मिला है। जिससे परिवार का किसी तरह गुजारा चल रहा है। कहा कि 100 दिन काम नहीं मिल पाता है।
20 दिन मिला कार्य
फोटो 24 एचएएमपी 03 परिचय- प्रेम निषाद
पत्योरा निवासी श्रमिक प्रेम निषाद ने बताया कि जॉबकार्ड है, लेकिन काम नहीं मिलता है। शुरूआत में 20 दिन काम मिला था। तबसे दोबारा काम नहीं मिला है। जिसके चलते उसके पुत्र मजदूरी करने सूरत गुजरात गए हुए हैं।
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कोट-
मनरेगा के तहत ज्यादा से ज्यादा श्रमिकों को साल में न्यूनतम 100 दिन काम मिले इसे लेकर प्रयास किए जाते हैं। अगर किसी को काम नहीं मिल रहा है ब्लॉक व ग्राम पंचायतों पर काम के लिए संपर्क करें। उन्हें काम दिलाया जाएगा।
-मनोज कुमार राय, डीसी मनरेगा