फसल के सदमे में किसान की मौत मामले में लेखपाल की मनमानी प्रशासन को भारी पड़ गई। जिला उपभोक्ता फोरम ने किसान के परिवार को किसान दुर्घटना बीमा की पांच लाख रुपये की राशि दो माह में दिलाने के आदेश दिए हैं।
साथ ही पांच हजार रुपये परिवाद व्यय देने के निर्देश दिए हैं। तय समय पर धनराशि न दिलाने पर छह फीसदी ब्याज के साथ भुगतान कराना होगा।
जिला उपभोक्ता फोरम ने यह आदेश नाबालिग लड़की के परिवाद दायर करने पर दिया। सरीला तहसील के ग्राम गहुली की नीलम ने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया था। इसमें बताया था कि उसके पिता दुर्जन सिंह पुश्तैनी भूमि के मालिक थे। 13 मई 2014 को पिता खेतों की ओर गए। वहीं उनकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनकी मौत चोट लगने से बताई गई थी। इस पर उसने किसान दुर्घटना बीमा का लाभ पाने के लिए सभी प्रपत्र संबंधित विभाग में जमा किए, लेकिन उसे लाभ नहीं दिलाया गया। बताया जाता है कि लेखपाल रामसजीवन ने अपनी रिपोर्ट में किसान की मृत्यु अत्यधिक शराब बता दिया था। इसी कारण उसे किसान दुर्घटना बीमा का लाभ नहीं मिला।
इस पर नीलम ने जिला उपभोक्ता फोरम की शरण ली। फोरम ने पूरे मामले की सुनवाई में जिला प्रशासन को दोषी माना। फोरम ने अपने आदेश में कहा कि स्थानीय लेखपाल नोडल एजेंसी के रूप में नामित है। किसान की मौत होने पर कार्रवाई के लिए वही जिम्मेदार है। किसान की मौत पर सरकार बीमा के रूप में पांच लाख रुपये देती है।
फोरम अध्यक्ष न्यायाधीश संतोष कुमार विश्वकर्मा और सदस्य हुमैरा फातिमा ने कहा कि डीएम और लेखपाल शासनादेश के अनुसार पीड़ित किसान के परिजनों को पांच लाख रुपये दो माह के अंदर दिलाएं। साथ ही मानसिक और परिवाद व्यय के लिए पांच हजार अदा करें। यह भी कहा कि अगर समयावधि के अंदर यह धनराशि नहीं दी गई तो छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।