रामलीला के पांचवें दिन राम सीता विवाह और परशुराम लक्ष्मण संवाद का मंचन किया गया। सीता स्वयंवर के बाद जमकर आतिशबाजी हुई।
शनिवार रात मंचन के दौरान मिथलापुरी के राजा जनक ने पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर कराया। गुरु विश्वामित्र ने राम की ओर इशारा कर कहा, उठो राम और धनुष उठाकर राजा जनक की प्रतिज्ञा पूरी करो।
राम ने पलक झपकते ही धनुष खंडित कर दिया। सभा में मौजूद सीता ने राम को वर माला पहनाई। ये देख पूरे पांडाल में राम-सीता की जयकार होने लगी। राम विवाह के मौके पर जमकर आतिशबाजी भी हुई।
इसके पहले राजा जनक के दरबार में लंकापति राजा रावण और पाताल लोक वाणासुर का संवाद सराहा गया। धनुष भंजन की गर्जना सुनकर जब मंच पर परशुराम आए तो उनका आक्रोश देख स्वयंवर में मौजूद राजा महाराजा कांप उठे।
परशुराम को आक्रोशित देखकर राम ने कहा कि हे नाथ शंभुधन भंजन हारा हुइहै कोऊ इक दास तुम्हारा। इसके बाद लक्ष्मण परशुराम संवाद को दर्शकों ने खूब सराहा।