हमीरपुर/मौदहा। सूखे बुंदेलखंड की धरती को हराभरा करने के उद्देश्य से बनाई गई अर्जुन सहायक परियोजना चांदीकला और भभई गांव के किसानों के लिए मुसीबत बनी है। जिस नहर से खेतों में खुशहाली आने की उम्मीद थी उसी ने खेतों को तालाब बना दिया। नहर की वजह से करीब 600 बीघा कृषि भूमि प्रभावित है जबकि अनुमानित 200 बीघा जमीन बीते 10 वर्षों से बंजर पड़ी है। किसानों का आरोप है कि उनका दर्द किसी ने नहीं सुना। मजबूरी में उन्हें पलायन करना पड़ा।
सरकार की महत्वाकांक्षी अर्जुन सहायक परियोजना के कागजी आंकड़े भले ही कुछ कह रहे हों लेकिन संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में तमाम दुश्वारियां सामने आ रही हैं। जिन किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए वही किसान खेतों से पानी निकालने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। फसल नष्ट होने और खेती चौपट होने से कई किसान अब गांव छोड़ने को मजबूर हैं।
चांदीकला और भभई गांव के किसानों ने बुधवार को नहर के पास सांकेतिक प्रदर्शन कर जलभराव से निजात दिलाने और पुलिया बनवाने की मांग उठाई है। किसानों का कहना है कि वर्ष 2016 में नहर निर्माण के दौरान बरसाती पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था ही नहीं की गई। खेतों के प्राकृतिक जलनिकास मार्ग बंद हो गए लेकिन उनके विकल्प में पुलिया या नाला नहीं बनाया गया। नतीजा यह हुआ कि बारिश होते ही खेत तालाब बन जाते हैं। पानी लंबे समय तक खेतों में भरा रहता है जिससे फसल सड़ जाती है और रबी की बोआई नहीं हो पाती। इससे करीब 36 किसान प्रभावित हुए हैं।
नहर कटते ही खेतों में भर जाता पानी
किसानों का आरोप है कि नहर में पानी छोड़े जाने के दौरान कई स्थानों पर कटान हो जाती है। पिछले शुक्रवार को कपसा, चांदी और सिसोलर के पास मुख्य नहर कटने से पानी आसपास के खेतों में फैल गया। देखते ही देखते सैकड़ों बीघे में खड़ी तिल और मूंग की फसल जलमग्न हो गई। हर बार नुकसान किसान का होता है। जिम्मेदार विभाग स्थायी समाधान नहीं कर पा रहा है।
दो साल पहले दिया था ज्ञापन
किसानों के अनुसार वर्ष 2024 में उन्होंने नहर विभाग के प्रमुख सचिव हीरालाल को ज्ञापन देकर समस्या से अवगत कराया था। उस समय जल्द समाधान का आश्वासन दिया गया था लेकिन दो वर्ष गुजरने के बाद भी खेतों की तस्वीर नहीं बदली। किसानों का आरोप है कि शिकायतें और ज्ञापन तो अधिकारियों तक पहुंचते रहे लेकिन समाधान जमीन पर नहीं उतरा।
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खेती चौपट होने का सबसे दर्दनाक असर किसानों के परिवारों पर पड़ रहा है। चांदी व भभई मौजे के किसान भोले प्रजापति, निरंजन सिंह, लालबहादुर सिंह, रमइया प्रजापति, बरातीलाल, रंगदेव सिंह, चंदन सिंह, रमेश विश्वकर्मा, राजेश सिंह, ललित नारायण सिंह, मुल्लू सिंह, दिनेश शुक्ला, राजेश, गप्पू सिंह, सुभाष परिहार, कल्लू सिंह, तेजप्रताप सिंह के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया तो परदेश कमाने चले गए। किसानों का दर्द है कि जमीन होने के बाद भी खेती नहीं कर पा रहे हैं।
जमीन होते हुए भी खेती नहीं कर पा रहे
भभई निवासी किसान गुलाब सिंह का कहना है कि नहर बनने के बाद से करीब 40 बीघा जमीन में हर समय पानी भरा रहता है। निर्माण के दौरान बरसाती पानी की निकासी के लिए पुलिया नहीं बनाई गई। शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जमीन होते हुए भी खेती नहीं कर पा रहे हैं।
ललित नारायण सिंह ने बताया कि जब नहर बन रही थी तभी किसानों ने खेतों में पानी भरने की समस्या बताई थी। अधिकारी कह रहे थे कि पुलिया बनाई जाएगी। वह अधिकारी अब कहां हैं। जब नहर बन रही थी तब पुलिया क्यों नहीं बनवाई। अब तो लगता है किसानों को आंदोलन ही करना पड़ेगा।
एक नजर में परियोजना
अर्जुन सहायक परियोजना वर्ष 2009-10 में शुरू हुई थी। परियोजना की संशोधित लागत 2,655.35 करोड़ रुपये है। बांदा, महोबा और हमीरपुर में कुल 44,381 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें हमीरपुर की 12,201 हेक्टेयर भूमि शामिल है। परियोजना का लोकार्पण 19 नवंबर 2021 को महोबा में किया गया था। मौदहा क्षेत्र में परियोजना की मुख्य नहर करीब 53.4 किलोमीटर क्षेत्र से गुजरती है।
अर्जुन सहायक नहर परियोजना की वजह से खेती नहीं हो पा रही है, ऐसी कोई शिकायत किसी किसान ने नहीं की है। जनसुनवाई से लेकर संपूर्ण समाधान तक शिकायत के कई माध्यम हैं। किसानों को अवगत कराना चाहिए। यदि भभई व चांदी गांव के किसानों की यह परेशानी है तो स्थलीय निरीक्षण कराकर आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - अभिषेक गोयल, जिलाधिकारी हमीरपुर
फोटो09एचएएमपी 14- जल निकासी की मांग करते किसान। संवाद- फोटो : 1
फोटो09एचएएमपी 14- जल निकासी की मांग करते किसान। संवाद- फोटो : 1
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