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किसानों को 90 फीसदी अनुदान पर मिलेंगे स्प्रिंकलर सेट

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ड्रिप सिंचाई योजना की जानकारी देते अधिकारी - फोटो : amar ujala
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हमीरपुर। शासन ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को पिछले दिसंबर माह में बंद कर दिया था। इस योजना से किसानों को मिलने वाले यंत्र अब बुंदेलखंड पैकेज में शामिल कर दिए गए हैं। इसके तहत जिले में किसानों को उद्यान विभाग 1647 हेक्टेयर जमीन पर बौछारी सिंचाई करने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। योजना के तहत लघु सीमांत किसानों को 90 फीसदी अनुदान मिलेगा।  
अभी तक किसानों को प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के जरिए अनुदान पर सिंचाई संबंधी यंत्र दिलाए जा रहे थे। लेकिन शासन ने पिछले 31 दिसंबर 2018 को यह योजना बंद कर दी है। वहीं बुंदेलखंड पैकेज के जरिए किसानों की आय दोगुनी करने को बुंदेलखंड में घटते भूगर्भ जलस्तर को देखते हुए कम पानी में अच्छी उपज लेने को ड्रिप इरीगेशन सिस्टम (टपक सिंचाई) शुरू की है। योजना में 101 हेक्टेयर जमीन पर यंत्र उपलब्ध कराने का लक्ष्य मिला है, जिसमें 41.90 करोड़ का अनुदान खर्च किया जाएगा। वहीं माइक्रो स्प्रिंकलर इरीगेशन सिस्टम (बौछारी सिंचाई) के लिए 1539 हेक्टेयर जमीन पर किसानों को यंत्र उपलब्ध कराए जाने हैं। इसमें 256.09 करोड़ रुपये उद्यान विभाग किसानों को अनुदान देगा।  
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पोष्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट योजना        
शासन की पोष्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट योजना के तहत जिले में सात इकाइयां स्थापित होंगी। विभाग में आए लक्ष्य के अनुसार एक राइपनिंग चैंबर (केला पकाना) की इकाई स्थापित करने में 50 लाख की लागत आएगी, जिसमें संबंधित किसान को 35 फीसदी यानी 17.50 लाख रुपये अनुदान मिलेगा। दो स्थानों पर प्याज भंडार गृह 25-25 एमटी क्षमता के बनाए जाने का लक्ष्य आया है। एक इकाई की लागत एक लाख 75 लाख लागत आएगी। संबंधित किसान को 87 हजार 500 रुपये अनुदान मिलेगा। इसी तरह दो आन फार्म पैक हाउस बनेंगे। जिसमें सब्जियों की पैकिंग की जा सकेगी। प्रत्येक में चार लाख की लागत आएगी। शासन इस पर दो लाख अनुदान देगा। जिले में दो छोटी प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होंगी। एक इकाई पर दो लाख की लागत आएगी। किसान को एक लाख रुपये का अनुदान मिलेगा।  
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इकाइयों के लगने से किसानों को मिलेगा लाभ        
जिला उद्यान अधिकारी उमेशचंद्र उत्तम का कहना है कि राइपनिंग चैंबर बनने से बागवानी में लगे किसानों को अच्छा लाभ मिलेगा। इसमें केला, आम, मुसम्मी जैसे फल रखे जाएंगे। वहीं प्याज भंडार गृह बनने से प्याज उत्पादन करने वाले किसानों को फसल खराब होने का भय नहीं रहेगा। जब बाजार भाव सही मिले इन गृहों से निकालकर बेच सकेंगे। कहा कि जिन किसानों को इस योजना का लाभ लेना हो वह आवेदन कर सकते हैं। इकाइयां स्थापित करने वाले कार्यक्रमों की पत्रावलियां शासन स्तर पर भेजकर स्वीकृति ली जाएगी। स्प्रिंकलर सेट पाने के लिए किसान आनलाइन आवेदन करें। पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर वितरित किए जाएंगे।
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