छिरका गांव में एकत्र अन्ना मवेशी।
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कस्बे में दूर-दराज के गांवों से अन्ना मवेशियों के झुंड कस्बे की ओर लाने का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। इस मामले में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। हालांकि छिरका गांव से सैकड़ों अन्ना मवेशियों को लेकर आ रहे आधा दर्जन किसानों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। कुछ समय कोतवाली में बैठाने के बाद इन्हें इस बात की चेतावनी देते हुए छोड़ा गया कि वह जो मवेशी जहां से लाए हैं, वहीं वापस ले जाएं। अन्यथा उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
बीते छह दिनों में दो बार हजारों की संख्या में मवेशियों को कानपुर-सागर राष्ट्रीय राज्यमार्ग के बड़े चौराहे में एकत्र कर जाम लगाया गया। प्रशासन ने जाम हटवाने के लिए इन अन्ना मवेशियों को मंडी समिति परिसर में बंद करा दिया। वहीं, कल कुनहेटा सहित आधा से अधिक गांवों के एक हजार अन्ना मवेशियों को राष्ट्रीय राज्यमार्ग पर लाया गया। लगातार चार-पांच घंटे मार्ग में मवेशियों का तांडव होता रहा।
बाद में दूसरे गांवों के किसानों ने एकत्र होकर उन्हें उसी जगह लौटा दिया। शुक्रवार को छिरका गांव के आधा दर्जन से अधिक किसान अन्ना मवेशियों को एकत्र कर कस्बे की ओर ले आए। इसकी सूचना जैसे ही पुलिस को मिली तो क्षेत्राधिकारी उमरदराज खां पहुंच गए और इन किसानों को हिरासत में ले लिया। किसान इस बात के लिए क्षमा मांगने लगे। इस पर कोतवाल घनश्याम पांडेय ने कड़ी चेतावनी देते हुए उन्हें छोड़ दिया। कहा कि किसी भी गांव के अन्ना मवेशियों को न तो दूसरी जगह हांका जाए और न कस्बे की ओर लाया जाए।
अन्ना मवेशियों को बांधा
सिसोलर थानाक्षेत्र के भैंसमरी गांव में क्षेत्र पंचायत सदस्य के साथ अन्य युवाओं ने मिलकर अन्ना मवेशियों से निजात पाने के लिए सराहनीय कार्य किया है। जिससे इस गांव में अपने आप अन्ना मवेशियों का 80 प्रतिशत समाधान हो गया। गांव भैंसमरी निवासी ओमप्रकाश मिश्रा क्षेत्र पंचायत सदस्य ने बताया कि लगातार पंचायतों और पुलिस के दबाव के बावजूद अन्ना मवेशियों का समाधान नहीं हो रहा था। तब उसने पूरे गांव को एकत्र कर अन्य युवाओं की सहमति से यह निर्णय लिया गया कि जो भी मवेशी हैं, प्रत्येक किसान एक-एक मवेशी गोद लेगा और लोगों ने साहस कर गांव के सामने इन मवेशियों को अपने घरों में बांध लिया है।