पत्योरा पंप कैनाल की मुख्य नहर की सफाई में जुटे किसानों की मेहनत रंग लाई है। नहर साफ करने पर पानी करीब डेढ़ किमी आगे बढ़ा है। मगर अभी भी नहर पुलियों के नीचे फंसे कचरे के न निकलने से पानी की रफ्तार नहीं बढ़ पाई है। अमर उजाला के इस अभियान के चलते गुरुवार को लघु डाल नहर विभाग के अधिशाषी अभियंता टीम के साथ लिफ्ट कैनाल का मुआयना करने पहुंचे।
करीब चार दशक पूर्व स्थापित की गई पत्योरा पंप कैनाल की हालत बदतर हो चुकी है। करीब दस किमी पानी भेजने वाला लघु डाल नहर विभाग इस बार मात्र दो से ढाई किमी में ही सीमित रह गया है। कई माइनरों में पानी तक नहीं पहुंचा है।
जिससे किसानों को सिंचाई के लिए अन्य साधनों का इंतजाम करना पड़ रहा है। अभी तक पंप कैनाल में लगी छह मोटरों में सिर्फ दो ही चलाई जा रही थीं। इधर, जब किसानों ने खुद नहर के शैवाल को हटाने का काम किया, तो अब पंप आपरेटर ने एक और मोटर चलाना शुरू कर दिया है।
किसानों की मेहनत रंग लाती दिख रही है। तीसरी मोटर चलने से अब करीब डेढ़ किमी पानी और आगे पहुंचा है। जलाला के किसान दिलीप शर्मा व कुंज बिहारी सिंह ने बताया कि नहर की पुलियों के नीचे कचरा फंसा हुआ है। जिसे नहर चालू करने के पहले विभाग को साफ करा देना चाहिए था, मगर अधिकारी नाममात्र का काम दिखा बजट को ठिकाने लगा रहे हैं।
पत्योरा पंप कैनाल को चालू कराने के मामले में अमर उजाला की इस मुहिम पर गुरुवार को अधिशाषी अभियंता सुनील कुमार अपने अधीनस्थों के साथ पत्योरा पंप कैनाल पहुंचे और मौके का जायजा लेने के बाद किसानों को दो दिनों में टेल तक पानी पहुंचाने का वादा किया।