हमीरपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बिजली विभाग की लापरवाही पर सख्त टिप्पणी की है। आयोग ने एनआर (नो रीडिंग) बिल भेजने को सेवा में त्रुटि मानते हुए उपभोक्ता को 10 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और दो हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश दिया।
मुस्करा थाना क्षेत्र के न्यूरिया निवासी शिवकरन ने आयोग में परिवाद दाखिल किया। उनके मकान में 12 नवंबर 1991 से बिजली कनेक्शन और मीटर लगा था। आरोप था कि विभाग ने मीटर रीडिंग के बजाय लगातार एनआर बिल भेजे और मनमाने तरीके से वसूली की। 21 सितंबर 2020 को विभाग ने उन पर 1.08 लाख रुपये बकाया दिखाकर कनेक्शन काट दिया। अगले दिन कनेक्शन जोड़ा गया, पर अधिकारियों ने सुनवाई नहीं की। विभाग ने नियमित रीडिंग पर बिल भेजने और फरवरी 2022 से मीटर में रीडिंग जमा न होने का दावा किया।
सुनवाई में आयोग ने पाया कि विभाग उपभोक्ता खाते का विवरण और रीडिंग संबंधी अभिलेख पेश नहीं कर सका। आयोग ने फरवरी 2022 से लगातार एनआर बिल जारी होने तथा खराब मीटर न बदलने को सेवा में स्पष्ट कमी माना। अध्यक्ष महेश कुमार कुशवाहा, सदस्य राम प्रताप और स्वर्णलता जायसवाल की पीठ ने आदेश दिया कि विभाग 18 सितंबर 2020 तक के 1.08 लाख रुपये बकाये को यथावत रखे। साथ ही, फरवरी 2022 तक के बिल वास्तविक रीडिंग के आधार पर 30 दिन में उपभोक्ता को उपलब्ध कराए और खराब मीटर बदलकर आगे के बिल रीडिंग के अनुसार जारी करे।