भरुआसुमेरपुर। रोजा बातिनी इबादत है, क्योंकि जब तक हम किसी पर जाहिर नहीं करते। किसी को ये इल्म नहीं हो सकता कि हमारा रोजा है और अल्लाह बातिनी इबादत को ज्यादा पसंद फरमाता है। माहे रमजान के फैजान के क्या कहने। इसकी तो हर घड़ी रहमत भरी है।
इस महीने में अज्रो सवाब बहुत ही बढ़ जाता है। ईदगाह मदरसे के मौलाना रियाजुल हसन ने बताया माहे रमजान में नफ्ल का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब सत्तर गुना कर दिया जाता है। बताया एक हदीस के मुताबिक एक बार दरूद शरीफ पढ़े तो लाख दरूद शरीफ का सवाब मिलता है।
एक और हदीस में आता है कि जो कोई रमजान उल मुबारक में एक बार सुभान अल्लाह कहें तो उसको इस कदर सवाब मिलेगा जो गैर रमजान में एक लाख बार सुभान अल्लाह कहने पर मिलता है। मौलाना ने बताया एक और रिवायत के मुताबिक अर्श उठाने वाले फरिश्ते रोजेदारों की दुआ पर आमीन करते रहते हैं।
बताया कि एक रिवायत के मुताबिक रमजान के रोजेदारों के लिए दरिया की मछलियां इफ्तार तक दुआ ए मगफिरत करती रहती हैं। बताया रोजा बातिनी इबादत है, क्योंकि जब तक हम किसी पर जाहिर नहीं करते, किसी को ये इल्म नहीं हो सकता।
जैसा कि हदीसे पाक में मदीने के सुल्तान नबी करीम का फरमाने आलीशान है कि अल्लाह की राह में पोशीदा यानि छुपाकर एक पैसा देना उन एक सौ पैसों से अफजल है जो जाहिर में दिए जाएं।
मौलाना ने मुस्लिम भाइयों से अपील की है कि माहे रमजान की इबादतों से दूर न रहे। लेकिन कोरोना बीमारी के चलते सामाजिक दूरी का ख्याल रखें।