हमीरपुर। मुख्यालय सहित कस्बों व ग्रामीण अंचलों में प्रकाश पर्व उत्साह व उमंग के साथ आस्था पूर्वक मनाया गया। लोगों ने घर में गणेश लक्ष्मी की पूजा कर सुख समृद्धि की याचना की। भैयादूज पर बहनों ने भाइयों के मस्तक पर तिलक लगाकर दीर्घायु होने की कामना की। इसके साथ ही गोवर्धन पूजा व मौन व्रत की परंपरा भी निभाई गई। जगह-जगह दीवारी नृत्य के आयोजन चलते रहे।
धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन पूजा व भैयादूज पर्वों का प्रकाश पर्व दिवाली पूरे उत्साह व आशा के साथ जिले भर में मनाया गया। धनतेरस पर बर्तन व सोने-चांदी की खरीदारी हुई। वहीं दिवाली पर दीप जलाने से पूर्व घर-घर श्रीगणेश व लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना की गई। व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भी पूजा अर्चना की गई। दिवाली के अगले दिन परेवा पर गोवर्धन पूजा भी जगह-जगह पर विधि विधान से की गई।
मौनियों ने मौन व्रत धारण कर मोर पंखों के साथ श्रीकृष्ण की उपासना की और मौन चराने की परंपरा को निभाया। भैयादूज के अवसर पर बहनों ने भाइयों के मस्तक पर रोली चंदन और हल्दी लगाकर उनके दीर्घायु होने की कामना की। पौथिया प्रतिनिधि के अनुसार बैठका स्थान पर पौथिया, कीरतपुर, सहजना, कलौलीतीर गांव के मौनिया एकत्र हुए। इस मौके पर पुरानी परंपरा के अनुसार व्रत धारण किए मौनियों को परात में पानी पिलाया गया। ग्रामीणों में जमकर दीवारी नृत्य हुआ, एक दूसरे के गले मिलकर त्योहार की बधाई दी।
खेड़ाशिलाजीत में इस बार 93 युवाओं ने मौन वृत धारण किया। सभी ने मिलकर चार बीघे ज्वार की फसल लेकर गायों से खिलवाया पुण्य कमाया। सरीला प्रतिनिधि के अनुसार नगर के पहाड़ी तालाब में बजरंग बली मंदिर परिसर में दिवारी नृत्य एवं भजन कीर्तन हुआ। बरगवां गांव में मेला दिवारी नृत्य एवं लोकगीत का कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष जयंती राजपूत ने किया। उनके प्रतिनिधि संतराम राजपूत, ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि दृगपाल राजपूत मौजूद रहे।
लोकगीत पार्टी में बलराम यादव व रानी कुशवाहा, गुड़िया राजपूत खरगापुर आकाशवाणी छतरपुर ने प्रस्तुति दी। भइयादूज पर करियारी के सुरारा मठ में दिवारी नृत्य व मेले का आयोजन हुआ। मौदहा प्रतिनिधि के अनुसार छिमौली गांव में मौन चराने मासूम बच्चे भी निकले। ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि लालाराम निषाद ने सभी का अभिनंदन कर रवाना किया। क्षेत्र के अन्य गांवों से भी मौनिया निकट के देव स्थानों पर पहुंचे।
जहां दिवारी नृत्य हुआ। मान्यता के अनुसार लोग कई वर्ष तक मोर पंख लेकर मौन रखते हैं। क्षेत्र में उटाहटा बाबा, छिमौली के निकट सिद्ध बाबा, बड़े देव बाबा आदि स्थानों में पहुंचते हैं जहां मेला लगते हैं। सोमवार को जगह जगह दीवारी नृत्य और मौनियों की धूम रही है। सुमेरपुर प्रतिनिधि के अनुसार झालरों व दीपे से मकानों को सजाया गया। व्यापारियों ने बस्तों का पूजन कर श्रीगणेश लक्ष्मी की पूजा की। परेवा पर महिलाओं ने गोबर्धन पूजा की तो मौनियों ने मौनवृत रखकर गोवंश को चराई।