सुमेरपुर के पचखुरा गांव में मृतक की रोती बिलकती महिलाएं।
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सात बीघे खेत में बोई तिल व उरद की फसल बर्बाद होने से आहत एक युवक किसान ने खेत से लौटते समय रास्ते में बाग में महुआ के पेड़ से लटकर फांसी लगा ली। घटना की जानकारी होने पर परिवार में कोहराम मच गया। किसान पर लाखों रुपयों का कर्जदार भी था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
पचखुरा बुजुर्ग निवासी रवींद्र प्रताप सिंह (38) वर्ष पुत्र दिग्विजय सिंह ने अपनी पुश्तैनी जमीन पर तिल के साथ उरद की फसल बोई थी। इसके साथ करीब 70 बीघे जमीन बलकट गिरवी रखकर तिल के साथ उड़द बोया था। अतिवृष्टि के कारण पूरी फसल चौपट हो गई। इससे वह बेहद परेशान था और आर्थिक रूप से भी कमजोर हो गया था। सोमवार सुबह वह घर से खेतों में जाने की बात कहकर निकला था।
दोपहर करीब ढाई बजे गांव के समीप बाग में महुआ के पेड़ से लटकर उसने फांसी लगा ली। किसानों ने उसे फांसी पर लटके देखा, तो परिजनों को सूचित किया। इससे परिवार में कोहराम मच गया। मृतक के चाचा देवेंद्र सिंह ने थाने में सूचना दर्ज कराने के बाद बताया कि बैंकों तथा साहूकारों का करीब पांच लाख रुपये कर्ज था। जिसकारण रवींद्र काफी परेशान था।