वायरल, मलेरिया व डेंगू बुखार से जिला कारागार भी अछूता नहीं है। कारागार में 30 मरीज बुखार से पीड़ित हैं। बीते रविवार को बुखार पीड़ित सजायाफ्ता कैदी की मौत के बाद जेल में कैंप लगाकर बंदियों का उपचार करने की तैयारी चल रही है। उधर, पेट रोगी दो बंदियों को कानपुर मेडिकल कालेज भेजा गया है। जिनका वहां आपरेशन कराया गया है।
जिला कारागार में क्षमता से अधिक बंदी है। इन दिनों इनकी संख्या 744 है। एक बैरक में 30 बंदियों को रखे जाने के निर्देश हैं लेकिन इनकी संख्या अधिक होने से एक बैरक में 80 बंदी रखे जा रहे हैं। क्षमता से अधिक बंदियों के भरे होने से उनका रहन सहन गड़बड़ा रहा है। यही कारण है कि संक्रामक बीमारियां बंदियों के घेर रही हैं।
मौजूदा समय में करीब 30 बंदी बुखार से पीड़ित हैं। यहां आजीवन कारावास की सजा काट रहे शैलेंद्र सचान (30) पुत्र रविंद्र निवासी मीनापुर थाना बरौर की बीते रविवार को कानपुर में इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। उसके खिलाफ तीन और आपराधिक मामले चल रहे हैं। उसे एक सप्ताह पूर्व बुखार आया तो कारागार से अस्पताल से उसने दवा ली।
इसके बाद उल्टी होने पर बीते 10 सितंबर को उसे जिला चिकित्सालय भेजा गया। वहां से डॉक्टरों ने ढाई घंटे बाद उसे वापस कर दिया। लेकिन शाम को फिर हालत बिगड़ने पर उसे सदर अस्पताल भेजा। जहां से उसे कानपुर रेफर कर दिया गया।
जहां हैलट में बुखार से उसकी मौत हो गई। जिला कारागार से रामलाल निवासी मझगवां और प्रमोद उर्फ मुलायम निवासी टीहर थाना बिवांर की हालत गंभीर होने पर कानपुर मेडिकल कालेज भेजा गया है। रामलाल का पहले से एक गुर्दा निकाला जा चुका है। उसका फिर से आपरेशन कराया गया है। वहीं, प्रमोद का भी पेट का आपरेशन कराया गया है।