विश्व महायज्ञ में भागवत कथा के पंाचवें दिन कथावाचक पं.ज्योति प्रकाश शास्त्री ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं व पूतना वध की कथा का वर्णन किया।
कथा सुनाते हुए कहा कि पाप रूपी अघासुर जो की जीव को कष्ट देता है उससे भक्तो को बचाते हुए उसका निवारण करना, वायु, जल, अग्नि, मिट्टी का संरक्षण कर स्वच्छता का संदेश दिया।
कथावाचक ने कहा कि मनुष्य को संसार में रहकर उसके ऊपर किए गए उपकारों को नही भूलना चाहिए। जबकि रुचि के आधार पर किया गया कार्य थोड़ी देर के लिए सुख देता है पर लंबे समय के लिए नही। कथावाचक ने व्यक्ति को अपने अंदर के अहंकार को मारने का संदेश दिया। अहंकार ही व्यक्ति का सबसे बड़ा बाधक है।