राठ सीएचसी में जन्मे नवजात जुड़वा बच्चे हेपेटाइटिस
का टीका लगने से बीमार हो गए। यह आरोप लगाते हुए माता-पिता ने बताया कि
बच्चों के शरीर में बड़े-बड़े फफोले पड़ गए हैं। राठ में बच्चों के इलाज
में लापरवाही पर सदर अस्पताल भेजा गया पर वहां भी चिकित्सकों ने दौड़ाया।
बाद में डीएम के आदेश पर अस्पताल में भर्ती तो कर लिया लेकिन चिकित्सकों ने
बच्चों की सर्जरी करने की बात कानपुर रेफर कर दिया।
मझगवां क्षेत्र के
बकरई गांव निवासी रामदयाल की पत्नी रीता (26) ने 9 अगस्त को सीएसची राठ
में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। इन बच्चों को स्वास्थ्य विभाग ने तभी
हेपेटाइटिस के टीके लगाए।
इसके बाद रीता की अस्पताल से छुट्टी कर दी गई।
आरोप लगाया कि करीब 3-4 दिन बाद बच्चों के टीका लगने के स्थान पर फोड़े हो
गए। जिनका धीरे-धीरे आकार बढ़ने लगा।
तब रीता ने आशा बहू का सहारा लिया तो
वह शनिवार को बच्चों को लेकर राठ सीएचसी लेकर गई लेकिन चिकित्सकों ने बिना
इलाज किए उन्हें टरका दिया।
रविवार को पीड़ित दंपति अपने बच्चों को लेकर
जिला अस्पताल आए लेकिन वहां से भी टरका दिया गया। इसी बीच उनकी मुलाकात
समाजसेवी देवेंद्र गांधी से हुई। इस पर देवेंद्र गांधी ने जिलाधिकारी से इस
संबंध में बात की।
जिलाधिकारी संध्या तिवारी ने सीएमएस मनीराम वर्मा को
फोन पर पीड़ितों के इलाज के निर्देश दिए। इस पर सीएमएस ने डा.राधेरमण व
सर्जन डा.विनय प्रकाश को इलाज करने को कहा।
चिकित्सकों ने बच्चों का
परीक्षण कर दवाएं तथा इंजेक्शन दिए। सर्जन डा.विनय प्रकाश ने बताया कि
बच्चों की सर्जरी करने पड़ेगी। यहां सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
इसलिए इन्हें कानपुर रेफर किया है।
एंबुलेंस नंबर 108 के जिला प्रभारी
राजेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने कानपुर के लिए 102 नंबर एंबुलेंस की व्यवस्था
की। इस पर 102 के पीएमटी रावेंद्र कुमार व पायलट दिलीप कुमार पीड़ितों को
कानपुर ले गए।
देवेंद्र गांधी ने बच्चों के इलाज के लिए आर्थिक मदद भी की। सीएमएस डा.मनीराम वर्मा ने हेपेडाइटिस टीके से पड़े फफोड़ों के मामले में
कहा कि बच्चों का वजन कम है। कमजोरी के चलते ऐसा हुआ होगा।
मुख्य
चिकित्सा अधिकारी डा. श्रीराम सोनी ने कहा कि किसी
भी दवा का कोई भी रियेक्शन हो सकता है। क्योंकि बच्चे अभी बहुत छोटे हैं
तो हो सकता है कोई और दवा रियेक्शन कर गई हो। फिर भी जानकारी की जाएगी और
अगर कोई दोषी पाया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी