बसपा सरकार में शुरू किए गए महामाया मुख्यमंत्री सचल
अस्पताल के पहिए एक बार फिर घूमने की उम्मीद जागी है। शासन ने सचल अस्पताल
के वाहनों की मौजूदा स्थिति का पता लगाने के लिए सर्वे कराया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है।
तीन वर्षों से
ठप पड़ी महामाया मुख्यमंत्री सचल अस्पताल योजना की सुध लेते हुए प्रमुख
सचिव स्वास्थ्य ने 15 जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के साथ बैठक कर
सचल अस्पताल के संचालन पर चर्चा की।
बैठक में योजना से जुड़े सर्विस
प्रोवाइडर अफसरों ने भी प्रतिभाग किया। इस दौरान वाहनों की स्थिति और उनमें
उपलब्ध उपकरणों की स्थिति पता लगाने के लिए सर्वे कराए जाने का निर्णय
लिया गया।
योजना से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर कैंप कंपनी के प्रतिनिधियों ने
स्वास्थ्य विभाग के साथ जिले में संयुक्त रूप से सर्वे किया। फिर सीएमओ की
ओर से शासन को भेजी रिपोर्ट में बताया गया कि जिले के विकास खंडों को
उपलब्ध कराए गए वाहनों में हल्की फुल्की मरम्मत की जरूरत है। गाड़ियों में
उपलब्ध कराए गए सभी उपकरण ठीक हैं।
ऐसा ही सर्वे प्रदेश के 15 जनपदों में
संचालित महामाया मुख्यमंत्री सचल अस्पताल के वाहनों और उपकरणों का कराया
गया है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि तीन वर्षों से थमे सचल अस्पताल के
पहिए एक बार फिर ग्रामीण अंचलों में घूमेंगे और ग्रामीण जनता को शासन की
महत्वाकांक्षी योजना का लाभ मिल सकेगा।
वर्ष 2011 में बसपा सरकार की
तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने अपने जन्मदिन पर मुख्यमंत्री सचल अस्पताल
योजना का शुभारंभ किया था। प्रदेश के 15 जनपदों के 133 विकास खंडों में
मेडिकल मोबाइल यूनिट का संचालन हुआ।
तब जिले में छह विकासखंडों के
सीएचसी/पीएचसी सुमेरपुर, मौदहा, मुस्करा, नौरंगा, गोहांड व सरीला में वाहन
दिए गए, लेकिन नौ महीने बाद ही इन वाहनों के पहिए थम गए।
मुख्य
चिकित्साधिकारी डा.श्रीराम सोनी ने कहा कि जनपद में उपलब्ध कराए गए सचल
अस्पताल के वाहनों की सर्वे रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। वाहनों की
स्थिति ठीक है, उपकरण भी सुरक्षित हैं। शासन के दिशा निर्देश मिलते ही
कार्रवाई की जाएगी।