मौसम में बदलाव के कारण उल्टी, दस्त, मलेरिया और
सीजनल बुखार ने पांव पसार लिए हैं। रोजाना पांच सौ से अधिक मरीज जिला
अस्पताल की ओपीडी में इलाज के लिए आ रहे हैं।
जिला अस्पताल में
डाक्टरों का टोटा है। इस कारण मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना
पड़ता है। यही हाल प्राइवेट क्लीनिकों का है। यहां भी मरीजों की भरमार है।
दिन
में तेज धूप तो सुबह और शाम चल रही ठंडी हवाएं लोगोें की सेहत बिगाड़ रही
है। खानपान अव्यवस्थित होने से लोग सीजनल बुखार के अलावा उल्टी और दस्त के
शिकार हो रहे हैं। मच्छरों के काटने के कारण लोग मलेरिया के भी शिकार हो
रहे हैं।
जिला अस्पताल में सुबह से मरीजों व तीमारदारों लंबी
लाइनें लग रही हैं। डाक्टरों की कमी के कारण मरीजों को घंटों लाइन में खड़ा
रहना पड़ता है। चिकित्सक डॉ. राधारमण गुप्ता और डॉ. वीसी पाल के ओपीडी
कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ लगी रहती है।
गौरतलब हो कि जिला
अस्पताल में एक भी फिजीशियन नहीं है। बालरोग विशेषज्ञों के भरोसे मरीजों का
इलाज किया जा रहा है। चिकित्सक ने बताया कि दो सप्ताह से मौसम के उतार
चढ़ाव व खानपान को लेकर सीजनल बुखार व मलेरिया से पीड़ित मरीज ज्यादा आ रहे
हैं।
जिला अस्पताल में 25 चिकित्सकों की पोस्ट है। इसमें से मात्र
13 चिकित्सक ही तैनात हैं। फिजीशियन, रेडियोलाजिस्ट और पैथालाजिस्ट नहीं
है। इस कारण मरीजों का समुचित इलाज समय से नहीं हो पाता। यही कारण है कि
अधिकांश लोग प्राइवेट चिकित्सकों से इलाज करा रहे हैं।
सीएमएस डॉ.
डीके माहुर ने बताया कि चिकित्सकों की कमी है। इसके लिए समय-समय पर
स्वास्थ्य निदेशालय को सूचना भेजी जा रही है। आशा है कि जल्द ही डाक्टरों
की कमी पूरी हो जाएगी।