मुख्यालय समेत क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में गुरु पूर्णिमा का पर्व धूमधाम
के साथ मनाया गया। विद्यालयों में हुईं गोष्ठियों में जहां गुरु-शिष्य
परंपरा पर चर्चा की गई वहीं मंदिराें में हवन पूजन के साथ भंडारे हुए।
गुरु पूर्णिमा पर गायत्री शक्तिपीठ में आयोजित दीपयज्ञ के दौरान उमेश
शुक्ल ने कहा कि गुरु शिष्य परंपरा प्राचीन भारतीय विधाओं की संरक्षक है।
भारतीय मनीषियोें ने शिष्यों के माध्यम से ज्ञान की धरोहर को जन-जन तक
पहुंचाने का कार्य किया है।
यज्ञ विज्ञान आयुर्वेद, योग विज्ञान, ज्योतिष
विज्ञान, संगीत, संस्कार परंपरा की विभिन्न उपासना पद्धतियां गुरू शिष्य के
माध्यम से ही जनमानस तक पहुंचती हैं। अखंड जाप के अलावा हवन पूजन हुआ और
दिन भर भंडारा का दौर जारी रहा।
इस दौरान भगवती प्रसाद, पुष्पेंद्र कृष्ण,
रमाकांत गुप्ता, सुमन शर्मा, पुष्पा गुप्ता, बिटटो धुरिया, शिवप्रसाद,
राकेश आदि मौजूद रहे। कुछेछा स्थित महर्षि विद्या मंदिर में वैदिक
मंत्रों से गुरु पूजन किया गया।
इस दौरान प्रधानाचार्य पंकज श्रीवास्तव,
संजय दीक्षित, राकेश शुक्ला, अनीता, अनूप तिवारी, संजय पांडे, मनीष, अनिल,
संजीव, आरती, नीलम आदि मौजूद रहे।
सरस्वती विद्या मंदिर में आचार्य
अरिमर्दन सिंह ने कहा कि मां पिता व गुरु जो कहें उसे सुनें अपनी बुद्धि के
अनुसार कार्य करें। संचालन करते हुए बलराम ने कहा गुरू की महिमा अनंत है।
समर्थ गुरु रामदास ने शिवाजी को, चाणक्य ने चद्रंगुप्त मौर्य को श्रेष्ठ
महान कुशल शासक बनाया। जिन्होंने देश की धारा को ही बदल दिया। इस मौके पर
जितेंद्र सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। गुरू पूर्णिमा के मौके पर मुख्यालय
स्थित पातालेश्वर मंदिर में महाआरती का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों की
संख्या में भक्तों ने भाग लिया।