गांव परखम में बालिका से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी की पुलिस चौकी से खींच कर हत्या के बाद फैले तनाव के डर से गांव छोड़कर गए वाल्मीकि समाज के लोग शुक्रवार को भी गांव नहीं लौटे। घटना के चार दिन बाद लोगों के न लौटने से गांव की बस्ती वीरान है। पालतू जानवरों को भोजन-चारा देने वाला कोई नहीं है। तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए गांव में पीएसी अभी भी तैनात है।
परखम प्रकरण को लेकर पुलिस और प्रशासन के वे सारे दावे हवाई साबित हो रहे हैं जिनमें उन्होंने पलायन करने वाले परिवारों के जल्द लौटने की बात कही थी। चार दिन बाद भी लोगों का अपने घरों में न लौटना साबित करता है कि डर अभी खत्म नहीं हुआ है। गांव में भले ही पीएसी और पुलिस की मौजूदगी हो लेकिन उन्हें सुरक्षा का अहसास नहीं हो रहा है। मामले को ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि प्रमोद ने भी बड़ा विवाद बताया। उनका कहना है कि ग्राम प्रधान अकेले इतने बड़े मामले की जिम्मेदारी कैसे ले सकते हैं। प्रकरण को सुलझाने में समय लगेगा।
उन्होंने वाल्मीकि परिवारों को गांव में लौटाने के लिए पंचायत कराने की बात कही। प्रधान प्रतिनिधि का कहना है कि पंचायत के जरिए सभी के मन की बात सामने आ सकेगी। इससे मामले का हल निकल सकता है। पुलिस की ओर से ओल चौकी प्रभारी ने बताया कि प्रशासन और वाल्मीकि परिवारों के मध्य बातचीत चल रही है। परिवारीजन कल गांव लौट सकते हैं।
अब तक नहीं साफ हुईं झाड़ियां
गांव परखम में जहां बालिका का शव बरामद हुआ था, उस स्थान से डीएम और विधायक ने झाड़ियां साफ कराने की बात कही थी। बवाल के चार दिन बीतने के बाद भी यह स्थान वैसा ही है। जहां बालिका का शव मिला था वहां से झाड़ियां हटाई नहीं गई हैं। बता दें कि इससे पहले गांव में हुई तीन बालिकाओं की हत्या के बाद उनके शव भी इन्हीं झाड़ियों से बरामद हुए थे।