आए दिन मौसम के रंग बदलने से किसान भयभीत है। फसलों पर प्राकृतिक आपदा की
मार झेल चुके किसान बची खुची फसलों को समेटने में जुटे है। पंजाब की मशीनरी
किसानों के लिए आसरा बन चुकी है। खेती से किसानों का मोह सा भंग होने लगा
है।
पहले खरीफ व अब रबी की फसल पर प्रकृति ने जमकर कहर बरसाया है। इस
क्षेत्र में खरीफ की फसल 70 प्रतिशत से अधिक खराब हुई थी। रबी फसल में
ओलावृष्टि से मटर, मसूर की फसलें तहस नहस हो चुकी हैं। गेहूं की फसल भी
जमीन में लेटी पड़ी है। फसल में भी 50 फीसदी से अधिक का नुकसान हो चुका है।
लेकिन प्रकृति का कहर अभी भी कम नहीं हुआ है।
दो दिन से आसमान में मंडरा
रहे बादल व तेज हवाओं से किसान भयभीत हैं। कसबे के बड़े किसान अरविंद
राजपूत व जयनारायन सिंह बताते है कि निजी संसाधनों के बाद भी प्राकृतिक
आपदा से किसान अछूता नहीं है। 60 से 70 प्रतिशत उत्पादन पर असर पड़ा है।
जानवरो के लिए भी इस साल भूसे का संकट रहेगा।
जरिया गांव के किसान राजू
तिवारी का कहना है कि क्षेत्र में मजदूरों का संकट होने की वजह से ज्यादातर
किसान पंजाब की मशीनरी के भरोसे है। फसल काटने व भूसा बनाने की मशीनों से
काम चलाया जा रहा है। यदि पंजाब के लोग यहां न आते तो किसानों की और मुसीबत
हो जाती।
छोटे किसान जुगल किशोर, नयनसुख, किशोरीलाल, हरीसिंह, देवी प्रसाद
आदि का कहना है कि खेती से अच्छा मेहनत मजदूरी करने में फायदा है। खेती
में हाड़तोड़ मेहनत के बाद भी लागत नहीं निकल रही है।
अगले साल खेती नहीं
करेंगे। फसलों की कटाई शुरू होते ही पंजाब के किसानों ने मशीनरी लेकर
क्षेत्र में कब्जा कर लिया है इसमें उन्हें मोटी कमाई होती है। लुधियाना से
आए हरमिंदर व निम्मका सिंह का कहना है कि उनके पास फसलें काटने व भूसा
बनाने की मशीनें है। यहां के लोग उनके संपर्क में रहते हैं।
फसल पकते ही इस
क्षेत्र में मशीनरी के साथ आते हैं। हार्वेस्टर से कटाई का रेट 1100 रुपये
एकड़ व 400 रुपये बीघा लेते है तथा भूसा बनाने का 2200 रुपये प्रति ढाला
ले रहे है। उन्होंने बताया कि पंजाब प्रांत से भारी संख्या में लोग इस मौसम
में यूपी सहित विभिन्न प्रांतों में निकल जाते हैं और अच्छी खासी कमाई कर
लेते हैं। कितनी कमाई होती है इसके बारे में बताने से कन्नी काट ली।