जेल प्रशासन के उत्पीड़न से तंग आए एक विचाराधीन बंदी ने मंगलवार को पेशी के दौरान न्यायालय परिसर स्थित लाकअप में जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। बंदी की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल लाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे कानपुर रेफर कर दिया गया। बंदी ने जेल प्रशासन पर प्रताड़ित करने का
आरोप लगाया है। उधर जेल प्रशासन ने आरोपों को खारिज कर दिया है। राठ कस्बे के मुगलपुरा निवासी शिक्षक राकेश त्रिपाठी का पुत्र मोहित त्रिपाठी एक हत्या के प्रयास के मामले में बीते चार अक्तूबर 2013 से जिला कारागार में निरुद्ध है। मंगलवार को अदालत में पेशी के लिए जिला कारागार से सिपाही रमाशंकर पटेल, विमलेश कुमार, पवन कुमार व होमगार्ड
जयकरन एक वैन में विचाराधीन बंदी मोहित त्रिपाठी समेत आठ बंदियों को दीवानी न्यायालय परिसर लाए। जहां सभी बंदियों को लाकअप में छोड़ दिया गया। मोहित त्रिपाठी को लाकअप से डकैती न्यायालय पेशी के लिए ले जाया जा रहा था। तभी वह कोर्ट के दरवाजे के पास वह गिर गया। पुलिस ने आनन-फानन उसे वैन से जिला अस्पताल भेजा। जहां
चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया तो वह होश में आ गया। होश में आने पर मोहित ने आरोप लगाते हुए बताया कि डिप्टी जेलर अखिलेश मिश्रा उससे रुपयों की मांग करते हैं, न देने पर उसका मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न किया जाता है। कहा कि रोज रोज के उत्पीड़न से बेहतर है कि वह एक बार मर जाए। इसी के चलते उसने मंगलवार को पेशी के दौरान
जहरीला पदार्थ खा लिया। आरोप लगाया कि डिप्टी जेलर के रायटर रामकरन ने उसे जहरीला पदार्थ मुहैया कराया है। आरोप लगाया कि प्रतिबंधित ऐसी कोई वस्तु नहीं है जो जिला कारागार में उपलब्ध न हो। बताया कि पैसा दो तो सभी प्रकार की वस्तुएं उपलब्ध हो जाती हैं। जिला कारागार के जेलर केपी सिंह ने बंदी द्वारा लगाए गए आरोप को
बेबुनियाद बताया है। कहा कि जेल के अंदर किसी बंदी की मनमानी नहीं चलने दी जा रही है। बंदी मोहित त्रिपाठी को अपनी बैरक से दूसरी बैरकों में जाकर घूमने व अन्य कार्यों के लिए मना किया गया, जिससे वह डिप्टी जेलर पर आरोप लगा रहा है।
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
हमीरपुर। 20 सितंबर 2016 की शाम करीब पांच बजे पेशी के बाद बंदियों को जिला कारागार में निरुद्ध कराते समय आधा दर्जन बंदी पुलिस की आंखों में मिर्ची पाउडर झोंक कर भागने में सफल रहे थे। तब बंदियों को मिर्ची पाउडर लाकअप के पास बंदी के एक सहयोगी ने उपलब्ध कराया था। इतना ही नहीं बंदियों से मिलाई के दौरान उनके परिजन भी खाने पीने का सामान भी आसानी से जेल तक पहुंचाते हैं। विचाराधीन बंदी मोहित ही नहीं अन्य बंदी भी बताते हैं कि जिला कारागार में चरस, अफीम, गांजा जैसे प्रतिबंधित नशीले वस्तु आसानी से मुहैया हो जाते हैं। इसके लिए बंदी को मोटी रकम चुकानी पड़ती है। इससे पहले भी बंदी इस प्रकार के आरोप लगा चुके हैं। जबकि जेल प्रशासन इससे कन्नी काट सारा आरोप बंदियों पर ही मढ़ देते हैं।
उत्पीड़न की बात बता चुका मोहित
हमीरपुर। विचारधीन बंदी मोहित की अदालत में पेशी होने के कारण उसके पिता राकेश त्रिपाठी भी आए। उन्होंने बताया कि जेल प्रशासन के उत्पीड़न की बात मोहित कई बार बता चुका है। मगर जेल प्रशासन उसके पुत्र के साथ बराबर उत्पीड़न करता रहा जिससे उसके पुत्र ने आत्महत्या करने जैसा कठोर कदम उठाया।