राठ कस्बे को मौदहा बांध से भरपूर पानी देने वाली मुख्यमंत्री की
महत्वाकांक्षी राठ पुनर्गठन पेयजल योजना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट सौ दिन चले
अढ़ाई कोस की कहावत को चरितार्थ कर रही है। घोषणा के बाद से 20 माह गुजर
चुके है, लेकिन अब तक महज तकनीकी प्रस्ताव ही तैयार हो सका है। देखा जाए तो
शासन स्तर पर बैठे जलनिगम के अभियंताओं को तैयार किए गए तकनीकी प्रस्ताव
का मौके पर अवलोकन करना है। मगर लखनऊ मुख्यालय के अभियंताओं के न आने पर यह
योजना फिलहाल सिर्फ घोषणा तक सीमित होकर रह गई है।
मौजूदा समय में
राठ कसबे की आबादी करीब 78 हजार है। कसबे के बाशिंदों को नलकूपों के जरिए
पीने का पानी मुहैया कराया जा रहा है। लेकिन स्थापित नलकूप पर्याप्त नहीं
है। हालांकि कसबे में 11 नलकूप काम कर रहे हैं, दो पानी की टंकियां हैं और
तीन जनरेटर स्थापित हैं।
इस नगर की बढ़ रही आबादी को पीने के पानी की कमी
दूर करने के लिए हुए प्रशासनिक प्रयासों में सफलता मिली। 18 जून 2013 को
मुख्यालय में छात्रों को लैपटॉप बांटने आए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राठ
कसबे में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की घोषणा की।
फिलहाल जलनिगम ने वर्ष
2045 तक राठ को पर्याप्त पेयजल सुलभ कराने के लिए योजना को अमलीजामा पहनाने
की तैयारी तो की है। लेकिन काम जहां का तहां रुका पड़ा है। इस योजना से
मौदहा डैम के जरिए पानी की सप्लाई दी जानी है। इसका नाम राठ पुनर्गठन पेयजल
योजना रखा गया है। डैम के निकट इनटेकवेल बनेगा।
जबकि धनौरी गांव के निकट
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और राठ कसबे में अंबेडकर चौराहे के निकट 40 वाई 40
वर्ग मीटर जमीन पर स्वच्छ जलाशय बनाया जाना है। योजना के तहत जलनिगम ने
भूमि की तलाश पूरी कर ली है। इस योजना के निर्माण में 30 करोड़ रुपये का
खर्च आएगा। वर्ष 2045 तक इस कसबे की आबादी 1,11,685 हो जाएगी और मौदहा डेम
से 6.959 मिलियन क्यूसेक पानी लिया जाएगा।
लेकिन जलनिगम की उदासीनता का यह
हाल है कि सर्वे के बाद अभी तक सिर्फ तकनीकी प्रस्ताव ही तैयार हो सका है।
इस योजना की जांच शासन स्तर के अधिकारियों द्वारा की जानी है। लंबा अर्सा
गुजरने के बाद भी जांच कार्य खटाई में है। इसके चलते राठ पुनर्गठन योजना
बेमकसद साबित हो रही है। इस मामले में हो रही हीलाहवाली को देखते
जिलाधिकारी संध्या तिवारी ने जलनिगम के अधिशाषी अभियंता के खिलाफ शासन को
पत्र भेजा है।
अधिशाषी अभियंता जलनिगम आरएस मौर्य का कहना है कि बड़ी
योजना है। योजना को मूर्त रूप देने में समय लगता है। फिलहाल
सर्वे के साथ तैयार तकनीकी प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद तैयार किया
जाएगा। जमीन की तलाश पूरी हो चुकी है।