मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत अब बच्चों को सप्ताह में एक दिन दूध पिलाया
जाएगा। इसके लिए सप्ताह में एक दिन निर्धारित किया जाएगा। यदि संबंधित दिन
छुट्टी रही तो अगले दिन स्कूल खुलने पर छात्र-छात्राओं को दौ सौ मिलीलीटर
उबला हुआ दूध दिया जाएगा। शासन स्तर से स्कूली बच्चों को ऊर्जा एवं प्रोटीन की व्यवस्था तो की जा
रही है, लेकिन स्कूलों में बच्चों को शुद्ध पानी पीने के तरस रहे हैं।
जिले के 1230 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर
तक के विद्यालयों में एमडीएम का संचालन होता है। इन स्कूलों के बच्चों को
अब सप्ताह में एक दिन 200 एमएल उबला दूध पिलाया जाएगा।
यह व्यवस्था बच्चों
को ऊर्जा एवं प्रोटीन के निर्धारित मानकों की पूर्ति के लिए की गई है। देखा
जाए तो जिले में मिडडे मील में खिलाई जाने वाली पूड़ी और मीठे चावल को
करीब चार साल पूर्व ही बंद किया जा चुका है, लेकिन अब शासन ने निर्धारित
एमडीएम के मेन्यू में परिवर्तन कर पूड़ी और मीठे चावल को बाहर कर दिया है।
पूड़ी की जगह सब्जी रोटी को एमडीएम में खिलाया जाएगा। इसके अलावा नए मेन्यू
के मुताबिक बुधवार को कोफ्ता-चावल खिलाया जाएगा। जबकि इस दिन कढ़ी-चावल
अथवा खीर खिलाई जाती रही है।
शासन के सचिव एचएल गुप्ता ने जिलाधिकारी को
भेजे पत्र में क्रियान्वयन का आदेश दिया है। डीसी बभ्रूवाहन राजपूत
कहते हैं कि एमडीएम के नए मेन्यू का शासनादेश आ चुका है। आदेश में दिन
निर्धारित नहीं है। दिन का निर्धारण हो जाने पर बच्चों को दूध दिए जाने की
व्यवस्था की जाएगी। प्रबंध के लिए अलग से आदेश जारी होगा।
119 हैंडपंप खराब, स्कूलों में पीने को पानी नहीं
शासन स्तर से स्कूली बच्चों को ऊर्जा एवं प्रोटीन की व्यवस्था तो की जा
रही है, लेकिन स्कूलों में बच्चों को शुद्ध पानी पीने के तरस रहे हैं। जिले
में 119 हैंडपंप रिबोर लायक होने से वर्षों से बंद पड़े हैं। अधिशाषी अभियंता जलनिगम आरएस मौर्य ने बताया कि बेसिक
शिक्षा विभाग से जलसंस्थान को सूची मिल चुकी है। खराब हैंडपंपों का
सत्यापन करा रहे हैं। कुछ स्कूलों में लगे हैंडपंपों में हल्की फुल्की
मरम्मत की जरूरत है। सत्यापन के बाद ही हैंडपंपों की मरम्मत या रिबोर कराया
जाएगा।
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