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बारिश से झूम उठे मन और मौसम

Fri, 02 Jan 2015 12:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
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जिलेभर में रंगारंग कार्यक्रमों के बीच लोगों ने नव वर्ष का अभिनंदन किया। डीजे में फिल्मी गीतों की धुनों पर लोग थिरकते रहे तो कई लोगों ने अपने यहां धार्मिक अनुष्ठान के साथ वर्ष के मंगलमय होने की कामना की। इसके अलावा व्हाट्सएप, फेसबुक, मोबाइल के जरिए भी लोगों ने एक-दूसरे को शुभ कामना संदेश भेजे। छात्र-छात्राओं और नवयुवकों ने एक दूसरे को ग्रीटिंग कार्ड, फूल देकर एक दूसरे को मंगलमय की कामनाएं कीं। हालांकि बुधवार की रात से मौसम ने करवट बदली। रिमझिम बूंदाबांदी से किसानों के चेहरे खिल गए। पानी बरसा तो कोहरे की कमी से विजबिल्टी (दृश्यता) भी बढ़ी।
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भरुआसुमेरपुर प्रतिनिधि के अनुसार, बीते वर्ष की भांति इस साल भी 31 दिसंबर को मौसम बिगड़ा और बूंदाबांदी शुरू हो गई। फिर भी जगह-जगह पर नए साल के आगमन के जश्न के लिए बनाए गए कार्यक्रम में पूरा उत्साह कायम रहा। जैसे ही रात को 12 बजे तो युवा एक दूसरे को नए वर्ष की बधाइयां देने लगे।

इसी तरह रेलवे क्रासिंग के निकट, बस स्टैंड सहित विभिन्न स्थानों पर युवाओं ने डीजे की धुनों में थिरक कर नववर्ष का स्वागत किया। राठ प्रतिनिधि के अनुसार, बुधवार की देर शाम से गुरुवार दोपहर तक हुई बारिश ने नये साल का मजा किरकिरा कर दिया।
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शाम को बारिश होने से लोग नये साल की पूर्व संध्या का कार्यक्रम उत्साह के साथ नहीं मना सके। वहीं बारिश होने से ठंड भी बढ़ गई।  लेकिन युवाओं ने डीजे की धुन  पर नृत्य कर नए वर्ष का मजा फीका नहीं होने दिया और बुजुर्गों ने भी उत्साहवर्धन किया।

उधर, मुख्यालय में अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था ने नववर्ष के स्वागत में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता बद्रीप्रसाद द्विवेदी गहरौली ने किया। काव्य गोष्ठी की शुरूआत करते हुए प्रेमपाल द्विवेदी ने नया साल हो मंगल तारा, हंसी खुशी का रहे नजारा, कोई दु:खी गरीब न होवे, सुखी रहे परिवार तुम्हारा।

देवीदीन अविनाशी की रचना नए वर्ष आपके स्वागत में हम शब्द सुमन अर्पित करते हैं सराही गई। बद्री प्रसाद वर्मा ने रचना पढ़ी कि सज धज धरती खड़ी द्वार पर आवो नववर्ष अतिथि हमारे। आकाशवाणी छतरपुर के गीत गायक नारायन प्रसाद रसिक ने पढ़ी खून से लथपथ साल यह चला गया, बारूद की आग से तापता चला गया।

बद्री प्रसाद द्विवेदी ने रचना पढ़ी कि आज चमन में फूल हंस रहे है, पर वह महक नहीं है। संचालन राधेश्याम सोनी ने किया। काव्य गोष्ठी में रामशण दीक्षित, रामरतन श्रीवास, प्रेमगुप्ता, सीताराम, सईद आलम खां, कैलाश मौजूद रहे।
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