बार-बार क्षतिग्रस्त हो रहे यमुना पुल की स्लैब व बीमों की भार क्षमता
आंकने का काम शुक्रवार को हुआ। पीएनसी के वरिष्ठ इंजीनियर अपर जिलाधिकारी
की मौजूदगी में मेजर ब्रिज इनपेक्शन यूनिट (एमबीआईयू) मशीन के जरिए तीन
घंटे तक पुल की जांच पड़ताल करते रहे।
गौरतलब हो कि 19 जून और 1 जुलाई
को यमुना पुल के क्षतिग्रस्त होने से पुल के ऊपर से भारी वाहनों की आवाजाही
बंद है। क्षतिग्रस्त हिस्से के ऊपर ओवरब्रिज बनाकर हल्के वाहनों को निकलने
की अनुमति दी गई है।
इसी बीच निर्माण इकाई पीएनसी के इंजीनियरों द्वारा
पुल की क्षतिग्रस्त चार बीमों की मरम्मत कार्य जारी है। इसके पहले भी यमुना
ब्रिज की स्लैब चार बार धंस चुकी है। जिससे महीनाें यातायात बाधित रहा है।
बार-बार डैमेज होे रहे पुल का मुख्य कारण इंजीनियर ओवरलोड बता रहे हैं।
पीएनसी के अवर अभियंता मनीष कुमार ने बताया कि अब तक छह बार क्षतिग्रस्त हो
चुके पुल का सही कारण जानने के लिए कंपनी की एनएचएआई इलाहाबाद से मेजर
ब्रिज इनपेक्शन यूनिट को मुख्यालय लाया गया है। जो पूरे पुल की जांच कर रही
है।
बताया कि अपर जिलाधिकारी कुंजबिहारी अग्रवाल, कंपनी के जनरल मैनेजर
पीएस खंडूरी की मौजूदगी में पूरे पुल की स्नोग्राफी कराई जा रही है। बताया
कि यह कंप्यूटराइज्ड मशीन है। इस मशीन से पुल की भार क्षमता, पुल की अवधि व
पुल के बार बार टूटने के कारण का पता लग सके गा। जिसकी रिपोर्ट शाम को
जिलाधिकारी को दी जाएगी।