जिलाधिकारी संध्या तिवारी ने रविवार को पाटनपुर गांव में शिविर लगाकर
कुपोषित बच्चों का वजन कराया। लेकिन जब कोई तब्दीली नहीं दिखी तो लगातार 12
दिन तक कैंप लगाकर बाल विकास के अधिकारियों को बच्चों की देखभाल करने की
जिम्मेदारी दी। जहां उन्होंने कुपोषित बच्चों को वस्त्र वितरित किए वहीं
ग्रामीणों ने उनसे फसलों की बर्बादी का रोना भी रोया।
बड़ी आबादी वाले
पाटनपुर में कुपोषित बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी जिलाधिकारी लिए हैं।
गोद लिए इस गांव में वह प्रतिमाह कुपोषित बच्चों का वजन कराने आती है और
उनकी शारीरिक प्रगति का जायजा लेती हैं। मौजूदा समय में खेतों पर चली फसलों
की कटाई को लेकर कई परिवारों के कुपोषित बच्चे नहीं आ सके।
फिलहाल 7
बच्चों का अस्पताल के अधीक्षक अनिल सचान व बाल विकास परियोजना अधिकारी
इंद्रपाल वजन कराया। एक माह के अंतराल में बच्चों का वजन न बढ़ने पर
जिलाधिकारी ने 12 दिन तक लगातार शिविर लगाने के निर्देश दिए। कहा कि खेती
किसानी के काम को देखते हुए मजदूरों के कुपोषित बच्चों को आंगनबाड़ी
कार्यकत्री शिविर में रखकर बराबर देखभाल करेंगी और रात में परिजन बच्चों को
ले जाएंगे।
साथ ही एएनएम व चिकित्सक भी बच्चों की जांच पड़ताल के लिए
आएंगे। वहीं जिलाधिकारी ने इनके परिजनों से कहा कि वह स्वच्छता अपनाएं और
जो दवाएं व पौष्टिक आहर बच्चों को खिलाने के लिए दिए गए है उनका सेवन
कराएं। कुछ ग्रामीणों ने इस दौरान गेहूं सहित सभी फसलें बर्बाद होने की
दास्तां सुनाई और राहत राशि की चेक न मिलने की बात बताई।
इस पर उन्होंने कहा
कि गेहूं की फसल में नुकसान कम होने की वजह से उसमें राहत राशि नहीं दी जा
सकती। वहीं बीते वर्ष की क्षति के लिए जिनकी फसलों में चना, मसूर, मटर दर्ज
था। उन्हें ही राहत राशि दी गई है और आगे भी दी जाएगी।