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असम में शहीद हुआ हमीरपुर का जवान

Mon, 17 Oct 2016 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
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नक्सलियों के हमले में शहीद गहरौलीखुर्द के जवान नरेश (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला
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मौदहा (हमीरपुर)। कोतवाली क्षेत्र के गहरौलीखुर्द गांव निवासी सेना के वीर सपूत नरेश कुमार पाल रविवार रात असम के सिलीगुड़ी में उल्फा उग्रवादियों के हमले में शहीद हो गए। खबर आते ही उनके परिवार में कोहराम मच गया। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
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शहीद का पार्थिव शरीर मंगलवार दोपहर बाद तक आने की संभावना है। तमाम लोगों के अलावा सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल भी परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। गहरौलीखुर्द गांव के स्वर्गीय झल्ली पाल के चार पुत्रों में नरेश कुमार पाल (35) तीसरे नंबर के थे। वह महाराजा रेजीमेंट कंपनी-56 में तैनात थे। यह टुकड़ी सीमा पर मुस्तैद है। शहीद के भाई अधिवक्ता बचनेश पाल ने बताया कि भाई के शहीद होने की सूचना उन्हें सुबह मिली।

उन्होंने बताया कि नरेश रविवार रात सेना के वाहन से अपने साथियों के साथ सिलीगुड़ी जा रहे थे, तभी घात लगाए उल्फा उग्रवादियों के हमले में शहीद हो गए। वे अपने पीछे पत्नी शशि प्रभा, पुत्री शिवांगी (8) व पुत्र उत्कर्ष पाल (5) को छोड़ गए हैं। उनके शहीद होने से माता, पत्नी व अन्य परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। सोमवार को शोकसभा के बाद गांव के स्कूल में छुट्टी कर दी गई। खेतों में काम कर रहे किसान, मजदूर गांव के वीर सपूत की शहादत पर उनके घर पहुंच कर परिजनों को ढांढस बंधाते रहे। कोतवाली पुलिस के अलावा सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल व पूर्व विधायक युवराज सिंह भी परिजनों को सांत्वना गांव पहुंचे। शहीद के घर शोक जताने वालों का तांता लगा है। झल्ली पाल के चार पुत्रों में सबसे बड़े पुत्र मुन्नीलाल सरस्वती शिशु मंदिर में टीचर हैं। दूसरे पुत्र बचनेश पाल अधिवक्ता हैं। सबसे छोटा पुत्र राकेश अपनी मां कौसी के साथ खेती बाड़ी का काम संभाले है। शहीद नरेश कुमार पाल कड़ी मेहनत कर वर्ष 2000 में महाराज रेजीमेंट में जबलपुर (मप्र) में भर्ती हुए थे।
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