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यूनानी अस्पताल को खुद ही इलाज की दरकार

Sat, 25 Jul 2015 12:27 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
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आयुर्वेदिक यूनानी पद्धति से इलाज का अपना एक अलग महत्व है। एलोपैथी में दवाओं के रिएक्शन होने और विपरीत प्रभाव से लोग इस पद्धति के इलाज से बचने का प्रयास करते हैं लेकिन विकल्प के रूप में देशी दवाओं से इलाज के लिए आयुर्वेदिक/यूनानी अस्पतालों की स्थापना बड़े पैमाने पर की हुई, लेकिन धीरे-धीरे इस पद्धति के ज्यादातर अस्पतालों की हालत बेहद खस्ता है।
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आयुर्वेदिक व यूनानी अस्पतालों की दयनीय स्थिति पर विभाग मौन साधे है। कस्बा स्थित यूनानी अस्पताल की शुक्रवार को पड़ताल की तो पाया कि अस्पताल के बाहर बोर्ड तक नहीं है।

15 शैय्याओं वाला यूनानी अस्पताल में सिर्फ तीन लोगों का स्टाफ है। किराए के भवन पर संचालित इस अस्पताल की हालत बेहद दयनीय है। ऐसे में मरीज भी अस्पताल से मुंह मोड़ रहे हैं।
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रोजाना 10-15 मरीज औसतन अस्पताल में पहुंचते हैं। कस्बे के हैदरगंज मोहल्ले में वर्ष 1984 में 15 शैय्या युक्त अस्पताल स्थापित हुआ। प्रारंभ में यह अस्पताल भरपूर स्टाफ सहित चलता रहा।

लेकिन धीरे-धीरे इसकी हालत खराब हो गई। अस्पताल में बोर्ड तक नहीं लगा है। अस्पताल में वही पुराने लोग इलाज कराने पहुंच रहे हैं। अस्पताल में फार्मासिस्ट नहीं है इसकी वजह से वार्ड ब्वाय दवा वितरण का काम करता है। इस अस्पताल में राजकीय आयुर्वेदिक यूनानी दवाएं खुद सरकारी फार्मेसी ही आपूर्ति करती हैं।

आपूर्ति किया गया फुड़िया, फुंसी ठीक करने का मलहम पत्थर की तरह कठोर मिला। दवा वितरक ने बताया कि पेशाब में जलन, पेट दर्द व गैस बनने की दवाएं, आंख, कान में डालने वाली दवाएं नही हैं। अस्पताल में एक अंधेरी कोठरी में वार्ड है। मैदान में घास खड़ी है तो भवन बेहद जर्जर स्थिति में है।

बेड व बिस्तर भी जर्जर हो चुके हैं। चार बेड वार्ड में तो एक बेड बरामदे में पड़ा है। 15 शैय्यायुक्त इस अस्पताल में 13 पद सृजित है। जिसमें दो चिकित्सक महिला व पुरुष, दो स्टाफ नर्स, दो फार्मासिस्ट, दो वार्ड ब्वाय, एक कपड़े धोने वाला, दो सफाई कर्मी, एक चौकीदार व एक रसोइया के पद सृजित हैं।

प्रभारी चिकित्साधिकारी यूनानी अस्पताल डा.एफके खान ने कहा कि अस्पताल का भवन मात्र 2950 रुपये के किराए पर है। मकान मालिक इसे खाली कराने के चक्कर में मरम्मत नहीं करा रहा है।

अस्पताल का बोर्ड जर्जर होकर टूट चुका है, जिसे बनवाया जा रहा है। दवाओं का कुछ अभाव अवश्य है, जिसकी मांग की गई है। अस्पताल निर्माण को स्टेशन मार्ग पर भूमि पड़ी है।

भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है लेकिन इस समय कोई नया प्रस्ताव नहीं है। जमीन पर कुछ लोग कब्जा भी कर रहे हैं। इनके विरुद्ध कार्रवाई कराई गई।  
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