भवन निर्माण सामग्री की बढ़ी कीमतों ने इंदिरा आवास योजना को अर्थहीन बना दिया है। साल में महज बीस हजार रुपये कमाने वाले किसी भी लाभार्थी के लिए 70 हजार रुपये अनुदान में पक्का आवास बना पाना असंभव है। देखा जाए तो इतनी धनराशि से महज भवन के फाउंडेशन बनवाने में ही चली जाती है। फिलहाल केंद्र सरकार की यह योजना आज पूरी तरह बेमकसद हो गई है।
केंद्र सरकार की ओर से गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए इंदिरा आवास योजना चलाई जा रही है। इस योजना में गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वालों को एक कमरा व बरामदा बनवाने के लिए 70 हजार रुपये अनुदान के रुप में मिल रहा है।
मौजूदा समय में पक्का मकान बनवाने की सामग्री के जो रेट हैं, उन्हें देखते हुए 70 हजार रुपये में एक कमरा बन पाना मुमकिन ही नहीं है। इंदिरा आवास योजना का लाभ बीपीएल श्रेणी वाले गरीबों को ही मिलता है। बीपीएल में वह लोग आते है, जिनकी सालाना आय 19 हजार 884 रुपये मानी जाती है।
इंदिरा आवास योजना का लाभ लेने की एक शर्त यह भी कि उस व्यक्ति के पास 20 वर्ग मीटर की जगह भी होनी चाहिए। इंदिरा आवास में एक कमरा (10 बाई 10) और एक छोटा बरामदा बनाना होता है। विकल्प के तौर पर बरामदा न बनवाकर छोटा हाल बनवा सकते हैं। भवन निर्माण सामग्री की कीमतोंव राजगीर, मजदूरी को देखते हुए एक कमरा बनवाने में लगभग एक लाख रुपये की लागत आती है।
फिनिशिंग, वायरिंग व फिटिंग अलग से, शौचालय की सुविधा पंचायतीराज विभाग के तहत दी जाती है। ऐसे में इंदिरा आवास योजना के लाभार्थी के सामने 70 हजार रुपये में एक कमरा व एक बरामदा बनवाना संभव नहीं हो पाता। नतीजन, आधे-अधूरे आवास कागजों पर पूर्ण दिखा दिए जाते हैं।
मुख्य विकास अधिकारी अवधेश बहादुर सिंह ने कहा कि इंदिरा आवास योजना केंद्र सरकार से संचालित है। इस योजना के तहत 75 फीसदी धनराशि की भागीदारी केंद्र और 25 प्रतिशत राज्य सरकार की ओर से होती है।
मौजूदा समय में 70 हजार रुपये प्रति लाभार्थी आवास के लिए मिलता है। कहा कि अब योजना में आवास पाने वाले लाभार्थी को 14 हजार रुपये मनरेगा से मजदूरी व 12 हजार रुपये पंचायती राज विभाग से शौचालय के लिए दिए जा रहे है।