जिसके जीवन में भजन नहीं है, जिसके जीवन में किसी संत
का दर्शन नहीं है ऐसे व्यक्ति का जीवन नरक के समान है। इसलिए प्रत्येक
माता पिता को अपने बच्चों के अंदर अच्छे धर्म कर्म के संस्कार डालने चाहिए।
जलबिहार मंच पर चल रही श्रीराम कथा के छठवें दिन उज्जैन से पधारी बाल
कथावाचिका प्रभु प्रिया ने श्रीराम कथा में कहा श्रीराम का नाम पानी में भी
नहीं गलता।
उन्होंने कहा कि राम के नाम के प्रभाव से हनुमान लंका पहुंच
गए थे और राक्षसों का सर्वनाश कर दिया था। कहा कि प्रत्येक माता पिता को
अपने बच्चों के अंदर ऐसे संस्कार डालने चाहिए जिससे वह अपने गुरुजनों और
बड़ों का सम्मान करें।
उन्होंने प्रभु राम के जन्म की कथा सुनाते हुए कहा
कि प्रभु के अयोध्या में जन्म लेते ही चाराें ओर खुशियां छा गईं। पूरे
अयोध्या में बधाई बजने लगी।
कथा सुनाते हुए कहा रामजी के जन्म के बाद जब
भगवान शंकर प्रभु राम केबाल रूप के दर्शन करने बाबा का भेष कर अयोध्या
पहुंचे तो द्वारपालों ने महल के अंदर जाने से रोक दिया। इस पर भगवान शंकर
निराश होकर रोने लगे।
प्रभु राम ने जब भगवान शंकर के रोने की आवाज सुनी तो
वह भी चीख चीख कर रोने लगे। कहा कि माता कौशिल्या की आज्ञा पर बाबा को अंदर
ले गए और जब बाबा का रूप धारण किए भगवान शंकर ने प्रभु राम को अपनी गोदी
में लिया तो प्रभु चुप हो गए और एक दूसरे को निहारते हुए प्रसन्न होने लगे।
कथा के दौरान कथावाचिका ने जब प्रभु के जन्म की समय की बधाई अपने मधुर कंठ
से सुनाई तो पंडाल में बैठी महिलाएं नाचने लगीं।