अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट चार के न्यायाधीश शैलोजचंद्रा की अदालत में मंगलवार को हत्या के दो मामलों में फैसला सुनाया गया। पहले मामले में अवैध संबंधों के चलते अधेड़ की हत्या में महिला को आजीवन कारावास की सजा वहीं दूसरे मामले में महिला की हत्या में पति को 10 वर्ष सश्रम कैद की सजा सुनाई गई।
अपर सत्र न्यायालय के सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आनंद सक्सेना ने बताया कि थाना ललपुरा के अछपुरा बहदीना गांव में 19 अगस्त 2012 की रात करीब साढ़े आठ बजे श्रीपाल निषाद कानपुर से दवा लेकर घर जा रहा था।
तभी स्वासा गांव में छत्रपाल सिंह के पुराने बोर के निकट गांव निवासी सुनीता ने अपने सहयोेगी एक नाबालिग के साथ तमंचा और हंसिया मारकर घायल कर दिया। उनसे बचकर भागा घायल श्रीपाल रात को घनश्याम के खेत में छुपा बैठा रहा। सुबह होने पर निकट के खेत मालिक रमेश निषाद को घटना की सूचना दी तो उसने श्रीपाल के भाई गयादीन को खबर की। वह घटना स्थल पर अन्य लोगों के साथ पहुंचा और घायल को लेकर थाने पहुंचा।
वादी गयादीन ने थाने में सुनीता और कृष्णा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसमें बताया कि उसके भाई के संबंध सुनीता से थे और वह उसके हिस्से की जमीन अपने नाम कराने का दबाव बना रही थी। भाई के मना करने पर सुनीता ने कृष्णा के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया। सदर अस्पताल से कानपुर रेफर कर दिया गया।
इलाज के दौरान कानपुर में 30 अगस्त को श्रीपाल की मौत हो गई। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि न्यायाधीश ने सुनवाई करते हुए अभियुक्त सुनीता को आजीवन सश्रम कारावास व 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि इस घटना के दूसरा आरोपी के नाबालिग होने पर उसका मुकदमा जुमनाइल कोर्ट भेजा है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मंगलवार को अदालत में थाना बिवांर के उमरी गांव में 17 जून 2011 को शिवदेवी की फावड़े से हत्या करने के मामले की सुनवाई हुई। बताया कि मृतका के भाई देवीदीन निवासी पौथिया ने 20 जून को अपने बहनोई हल्के प्रजापति व उसके छोटे भाई पंचम के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
जिसमें बहन की हत्या कर शव छुपाने की बात कही थी। इस मामले में हत्या करने वाले अभियुक्त पति हल्के को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं मृतका के देवर पंचम को साक्ष्य न मिलने पर दोष मुक्त कर दिया।