जिले को सर्वाधिक राजस्व देने वाला खनन विभाग यमुना
ब्रिज डैमेज होने से घाटे पर चला गया है। बीते वर्ष की तुलना में इस बार 1
करोड़ 40 लाख रुपये कम आया है। विभाग की मानें तो जून माह में चलाए गए ओवर
लोडिंग अभियान के चलते जिले की खदानों में मौरंग भरने के लिए कम संख्या
में ट्रक यहां आए। जिससे राजस्व पर अंतर पड़ा। इसके अलावा पुल डैमेज होने
से भी आवागमन बाधित है।
जिले में बेतवा, केन व धसान नदियों से मौरंग खनन
का कार्य होता है। खनन कार्य के लिए 60 पट्टे संचालित हैं। विगत वर्ष में
अप्रैल से जून माह तक खनिज विभाग ने 1952.72 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त
किया, जबकि इतने महीनों में चालू वित्तीय वर्ष में विभाग 1812.41 लाख रुपये
का राजस्व इकट्ठा कर सका है।
फिलहाल 140.31 लाख रुपये का राजस्व कम आया
है। इसके पीछे खनन कार्य में कई संकट सामने आए हैं। खनिज अधिकारी रामकुमार
ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश पर नदियों में बने 14 पुलों को तुड़वाया
गया है।
बताया कि यह पुल जिला पंचायत के आदेश पर फैरी एक्ट के तहत चलाए जा
रहे थे। ज्यादातर पुलों के जरिए जनपद जालौन से होकर मौरंग की निकासी की जा
रही थी, लेकिन उच्च न्यायालय के आदेश पर इन पुलों को उप जिलाधिकारी की
मौजूदगी में ढहा दिया गया।
उनका कहना है कि यमुना पुल के दो बार डैमेज
होने से ट्रकों की आवाजाही बाधित है। साथ ही जून माह में उनके द्वारा ओवर
लोडिंग के खिलाफ सघन अभियान छेड़ा गया। जिसमें 57 ट्रकों का चालान कर 12.80
लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। इससे ट्रक मालिकों ने जिले की मौरंग
खदानों की तरफ रुख करना कम कर दिया।