हमीरपुर। मौरंग खनन के मामले में सीबीआई जांच में जुटी है। बुंदेलखंड में करीब सात अधिकारी अभिलेखों को खंगालने के साथ नदियों की तलहटी में जाकर निकाली गई मौरंग की पड़ताल करने में जुटे हैं। मौरंग खनन की जांच में सीओ रैंक का एक सीबीआई अधिकारी का मुख्यालय में डेरा है। वहीं आसपास के जनपदों में जांच कर रहे सीबीआई अधिकारी भी इधर से उधर जांच को पहुंच रहे हैं। इसके पीछे बताया जा रहा है कि कभी जिले का पट्टाधारक रहा मौरंग माफि या बेतवा नदी के उस पार से खनन कर राजस्व को चूना लगा गया। इस तरह के मामले बेतवा, धसान व केन नदियों में आते रहे हैं। बांदा के मौरंग माफिया केन नदी में जिले में खनन कराते रहे हैं।
यही हाल जनपद झांसी के खनन माफिया धसान नदी पर जिगनी गांव के निकट कर चुके हैं। नदियों में अवैध पुल बनाकर पोकलैंड व लिफ्टर मशीनों का उपयोग किया है। इसमें पर्यावरण को दर किनार कर मनमानी की गई है। मौरंग निकासी में सिंडीकेड हावी रहा है। इसमें प्रदेश सरकार के इशारे पर मौरंग का अवैध खनन हुआ। सीबीआई अधिकारी इन्हीं तमाम बिंदुओं पर जांच कर रहे हैं। खनिज विभाग से वर्ष 2012 में हुए 49 पट्टों के जरिए मौरंग का जमकर अवैध खनन हुआ है। उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई हर एंगल से जांच कर तह तक जाने में जुटी है। फिलहाल सीबीआई के डेरा डालने के बाद ज्यादातर मौरंग माफिया डरे सहमे हैं।