राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों तरफ लगाए गए पौधों पर वन विभाग ने जमकर धांधली की है। घटिया निर्माण करने के साथ इनकी संख्या में भी घपला किया गया है। लगाए गए पौधों व ब्रिक गार्डंो की संख्या में कई स्थानों पर सैकड़ों का अंतर कर नंबरिंग की गई है और 465 ब्रिक गार्डाें में करीब 14 लाख का
घपला किया गया है। इस मामले में डीएफओ ने पौधों की जांच कराकर कार्रवाई किए जाने की बात कही है। हाईवे निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में वृक्षों की कटान हुई थी। जिसकी भरपाई के लिए हाईवे ऑथरिटी ने वन विभाग को 65.52 लाख रुपये का बजट दिया था। इस बजट से वन विभाग ने वर्ष 2014-15
में 1166 व 2015-16 में 914 ब्रिक गार्ड बनाकर पौधे लगाने का दावा कर रहा है। इन ब्रिक गार्डों की संख्या दर्शाने के लिए नंबरिंग की गई है। लेकिन ब्रिक गार्डों के आस-पास झाड़ झंखार होने के कारण नंबरिंग का पता नहीं चल रहा था। लेकिनं बीते दिनों हाईवे निर्माण इकाई पीएनसी ने सड़क के दोनों ओर के
झाड़ झंखार को साफ कर दिया। जिससे ब्रिक गार्डो में अंकित नंबरिंग से धांधली उजागर हुई। वन विभाग ने इसमें जमकर खेल किया है। कुंडौरा के पास बाई तरफ बने ब्रिक गार्डों में 346 नंबर के बाद सीधे 506 नंबर अंकित किया गया है और 160 ब्रिक गार्डो का घपला किया गया है। इसी तरह कुंडौरा के पास
शिव मंदिर के निकट बने ब्रिक गार्ड में 504 नंबर अंकित है। जबकि गांव समाप्त होने के बाद नाले की पुलिया के पास बने ब्रिक गार्ड में सीधे 640 नंबर डाला गया है। इस तरह 136 ब्रिक गार्ड यहां भी गायब किए गए है। ओम हरिहर महाविद्यालय के पास 666 नंबर के बाद सीधे 738 नंबर अंकित किया गया है
और 72 पौधों का यहां भी घपला दिख रहा है। जबकि सुमेरपुर थानाक्षेत्र के सीमा बार्डर शाइन बोर्ड के पास 738 के बाद सीधे 835 नंबर डालकर 97 ब्रिक गार्ड व पौधों की धांधली की गई है। इस तरह वन विभाग करीब 465 ब्रिक गार्ड व पौधों का घपला किया है। सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई
सूचना में वन विभाग ने एक ब्रिक गार्ड की कीमत 2950 रुपये बताई है। उसके अनुसार करीब 13.71 लाख का घपला नजर आ रहा है। इस मामले में डीएफओ सोमधर पांडेय का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।