रामचरित मानस में कवि तुलसीदास ने लिखा है कि परहित सरस धरम नहिं भाई, पर पीड़ा सम नहिं अधि माई। इसी चौपाई ने मानव धर्म को अपनाते हुए एक दूसरे की मदद करने की बात कही है। रक्तदान प्राणदान से कम नहीं है इसीलिए इसे दुनिया का सबसे बड़ा दान है।
मनुष्य जीवन में चारोधाम कर पुण्य लाभ प्राप्त करता है। उसी तरह एक स्वस्थ्य मनुष्य जीवन में रक्तदान कर उससे भी बड़ा पुण्य लाभ हासिल कर सकता है।
अमर उजाला फाउंडेशन 14 जून को रक्तदान दिवस पर सदर अस्पताल में शिविर का आयोजन कर रहा है। रक्तदान करने से शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती है। चिकित्सकों का कहना है कि रक्तदान करने के बाद मानव के शरीर में तेजी से रक्त का निर्माण शुरू हो जाता है।
मौजूदा समय में खान-पान की कमी व शुद्ध पेयजल नहीं मिलने के चलते खून की कमी रहती है। इसका असर महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलता है।
जिसके चलते प्रसव के दौरान महिलाओं को अक्सर खून की जरूरत पड़ती है। इसी तरह दुर्घटनाओं व अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को ब्लड की जरूरत होती है। 18 से 60 आयु वर्ग के स्वस्थ्य मनुष्य रक्तदान कर सकते हैं।
रक्तदान हमेशा लाइसेंस शुदा ब्लड बैंकों या उनके अस्पताल के रक्तदान शिविराें में तीन माह के अंतराल में किया जा सकता है।
18 से 60 वर्ष तक आयु का कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति वर्ष में चार बार रक्त दे सकता है। एक यूनिट रक्त से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है।
इसके साथ ही रक्तदान के दौरान आप संक्रमण या रक्त से फैलने वाले रोग एचआईवी, हेपेटाइटिस तथा मलेरिया से ग्रस्त नही होंगे। इस पद्धति में प्रयुक्त होने वाले सभी उपकरण असंक्रमित होते हैं। रक्तदान से कोई कमजोरी नही आती है।
सीएमएस, सदर अस्पताल डा.डीके माहुर ने कहा आपरेशन के दौरान ज्यादातर लोगाें को खून की जरूरत होती है और इस जरूरत को रक्तदाताओं के द्वारा दिए गए रक्तदान से पूरा किया जाता है।
इसलिए हर व्यक्ति का फर्ज बनता है कि वह इस महादान में अपना सहयोग अवश्य करें। क्योंकि कभी न कभी हर परिवार के व्यक्ति को रक्त की जरूरत पड़ सकती है। रक्तदान करना एक पुनीत कार्य है और इस पुनीत कार्य में शामिल होकर व्यक्ति महान बन सकता है।