हमीरपुर। अवैध खनन में कमाई गई बेनामी संपत्ति की तलाश में सीबीआई जुटी है। सिंडीकेट संचालकों के साथ पट्टाधारकों से बयान लिए जा रहे हैं। सोमवार को पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी सहित कुछ पट्टाधारक और मुनीम सीबीआई के बुलावे पर बयान देने पहुंचे। सीबीआई ने सभी के बयानों की वीडियोग्राफी भी कराई।
उच्च न्यायालय ने 16 अक्तूबर 2015 को जिले में संचालित 60 मौरंग खनन के पट्टों को निरस्त किया था। नियमों को ताक पर रखकर यह पट्टे दिए गए थे। अब उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई मामले की जांच कर रही है।
सीबीआई आठ दिनों से मुख्यालय स्थित मौदहा बांध (निर्माण खंड) के डाक बंगले में है। यहां रहकर टीम मौरंग खनन के पट्टाधारकों और सिंडीकेट का संचालन करने वालों के बयान दर्ज कर रही है। पट्टा धारकों को नोटिस तालीम कराकर अलग-अलग तिथियों को बुलाया गया है।
इसी के चलते रोजाना पट्टाधारक बयान देने आ रहे हैं। सीबीआई सिंडीकेट संचालित करने वालों का खुलासा, उसके बाद 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर चुकी है। अब टीम उनकी बेनामी संपत्ति की तलाश में है। सीबीआई यह जानने के प्रयास में है कि इन लोगों ने कहां, किन लोगों के नाम से प्रापर्टी ली है।
सोमवार को जालौन के पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी, कौशिल्या चौबे, अशोक सचान उनके भाई विनोद व प्रमोद सचान, रामऔतार व रमेश मिश्रा के मुनीमों से सीबीआई ने पूछताछ कर वीडियोग्राफी कराई।
सेवानिवृत्त लिपिक ही पहुंचे ईडी के पास
लखनऊ में ईडी के बुलावे पर सोमवार को खनिज विभाग के सेवानिवृत्त लिपिक रामआसरे ही पहुंचे। वहीं सपा एमएलसी रमेश मिश्रा की ओर से उनके वकील पेश हुए। खनन के इस अवैध धंधे में पिछले पांच सालों में करीब दस हजार करोड़ रुपये का वारान्यारा होने का अनुमान है। जिसका लाभ लंबी पहुंच वाले सत्ताधारियों ने उठाया है। सीबीआई इन्हीं पहलुओं को टटोलने में लगी है। जानकार लोग बताते हैं कि जैसे ही बेनामी संपत्ति का खुलासा होगा, इन लोगों के पीछे इनकम टैक्स की टीम भी लग जाएगी।
सीबीआई के समक्ष बयान देने पहुंचे पट्टाधारक रहे पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी
अमर उजाला ब्यूरो