विकास के लिए एनजीटी में करेगा पैरवी
फोटो16एचएएमपी 21 जानकारी करते टीम के सदस्य। संवाद
भरुआ सुमेरपुर। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की दो सदस्यीय टीम ने मंगलवार को कस्बे की गायत्री गंगा (करोड़न नाला) का निरीक्षण किया। इस दौरान विकास, स्वच्छता एवं जल प्रदूषण की स्थिति का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान टीम ने गायत्री गंगा के संबंध में समाजसेवी राजेश कुमार शिवहरे से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बताया कि लगभग 35 किलोमीटर लंबी इस जलधारा में कई छोटे-बड़े नाले तथा नहरों के टेल मिलते हैं, जिससे इसमें वर्षभर पानी बना रहता है। कस्बे के पश्चिमी क्षेत्र के गांवों में इसे नाला कहा जाता है, जबकि पूर्वी क्षेत्र के ग्रामीण इसे नदी के रूप में जानते हैं।
उन्होंने बताया कि करीब सात दशक पूर्व ब्रह्मलीन संत स्वामी रोटीराम महाराज नागा स्वामी ने इस जलधारा को गायत्री गंगा नाम दिया था। तब से स्थानीय लोग इसे इसी नाम से जानते हैं। टीम को जल शक्ति मंत्रालय के निरीक्षण सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी उपलब्ध कराई गईं। संस्था के सदस्य विवेक मिश्रा एवं विकास चौधरी ने बताया कि गायत्री गंगा की वर्तमान स्थिति, जल प्रदूषण और विकास संबंधी संभावनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर संस्था राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में इसके संरक्षण एवं विकास के लिए प्रभावी पैरवी करेगी।