लोगो == पड़ताल का
- चारा-पानी और इलाज के नहीं इंतजाम, खड़े-खड़े गुजार रहे जिंदगी
- मुख्यमंत्री के आदेश के बाद नहीं मिल रहा हरा चारा
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर/भरुआ सुमेरपुर। निराश्रित गो-आश्रय स्थल जहां पर इन दिनों बरसात, कीचड़ और चिकित्सा के अभाव में गोवंश दम तोड़कर सरकारी दावों की पोल खोल रहे हैं। लग रहा है इन दिनों इनकी देखभाल अधिकारियों की प्राथमिकता पर नहीं है। बेसहारा गोवंशों के संरक्षण के लिए सरकार की ओर कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसमें उनके संरक्षण से लेकर खाने व चिकित्सा तक की व्यवस्था है। लेकिन जिले तक आते आते ये सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित होकर रह जाती हैं। इसकी हकीकत जिले में संचालित 167 गो-आश्रय स्थलों में आसानी से देखी जा सकती है।
इन गोशाला में प्रति महीना लाखों रुपये भूसे, चूनी-चोकर व कर्मचारियों एवं चिकित्सा सुविधाओं पर पर खर्च किया जाता है, मगर यहां गोवंश दलदल भरे परिसर पर खड़े रहकर रात गुजार रहे हैं। इलाज और भूख से तड़प कर दम तोड़ रहे हैं। इन्हें देखने वाला कोई नजर नहीं आ रहा। संवाद न्यूज एजेंसी टीम ने शुक्रवार को सुमेरपुर क्षेत्र की दो और राठ की एक गोशाला की पड़ताल की, जिसमें आश्रय स्थलों की हालत बद से बदतर नजर आई।
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केस-1- दोपहर 12:54 बजे
फोटो 04 एचएएमपी 15- ग्राम पंचायत बिलहड़ी के आश्रय स्थल पर भरे दलदल में खड़े गोवंश। संवाद
विश्राम के लिए बने टीन शेड में भरा है भूसा
दोपहर 12:54 बजे बिलहड़ी ग्राम पंचायत में संचालित अस्थायी गो आश्रय स्थल पर मौजूद चरवाहा रामकुमार एवं गणेश ने बताया कि करीब 170 गोवंश संरक्षित हैं। इनके सेवा के लिए चार लोग लगे हुए हैं, लेकिन यह दो अन्य के नाम नहीं बता सके। आश्रय स्थल के अंदर कीचड़ होने से गोवंश खड़े-खड़े ही दिन-रात गुजार रहा है। विश्राम के लिए बने टीन शेड में भूसा भरा होने के कारण गोवंश को यह कष्ट उठाना पड़ रहा है। चरवाहों के अनुसार, अभी हरा चारा बारिश की वजह से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। बारिश बंद होने के बाद देना शुरू करेंगे।
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केस-2 दोपहर 1:15 बजे
फोटो 04 एचएएमपी 16- ग्राम पंचायत बांकी का गो-आश्रय स्थल। संवाद
गोवंश को बैठने तक की नहीं मिल रही जगह
बांकी ग्राम पंचायत में संचालित गो-आश्रय स्थल की दुर्दशा भी बदहाल दिखी। चारों तरफ कीचड़ होने से गोवंश को बैठने की जगह नहीं मिल रही है। कुछ गोवंश भूसा चारा डालने वाली चरही में बैठने को मजबूर हैं। गांव के नरेंद्र कुमार ने बताया कि गोशाला में 115 गोवंश संरक्षित हैं। अभी केवल भूसा दिया जा रहा है। हरे चारे के लिए बोआई करायी गई है।
बरसात के चलते नहीं कट पा रहा हरा चारा
मुख्यमंत्री के साफ आदेश हैं कि पशुओं को हरा चारा अवश्य दिया जाए, लेकिन आदेश का कहीं पालन नहीं किया जा रहा है। इस बरसात के सीजन में भी गोवंश को हरा चारा नहीं मिल पा रहा है। बिलहड़ी प्रधान जयनारायण विश्वकर्मा ने बताया कि बारिश के वजह से हरा चारा नहीं कट पा रहा है। हरे चारा की जगह दाना एवं पशु आहार दिया जा रहा है।
गोशाला खाली, नहीं मिले मवेशी
फोटो 04 एचएएमपी 17- राठ के बरदा गांव की गोशाला में कीचड़। संवाद
राठ। क्षेत्र के बरदा गांव की गोशाला में पड़ताल के दौरान एक भी मवेशी संरक्षित नहीं मिले। बारिश के चलते गो आश्रय स्थल में कीचड़ ही कीचड़ देखने को मिला। पानी व कीचड़ के चलते मवेशियों को बैठने के लिए भी जगह नहीं। ग्राम प्रधान कामता प्रसाद ने बताया कि गोशाला में 150 मवेशी हैं। बारिश के चलते गोशाला में कीचड़ हो गया है। ज्यादा समय तक दलदल में रहने से मवेशियों के पैर खराब होने का खतरा रहता है। इस लिए चरवाहे मवेशियों को चराने व टहलाने ले गए हैं। (संवाद)
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वर्जन:
सभी गोशालाओं में व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिन आश्रय स्थलों में इंटरलॉकिंग खडंजा नहीं है, उनमें खडंजा बिछवाया जाएगा। - डॉ. भूपेंद्र यादव, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी।
फोटो 04 एचएएमपी 15- ग्राम पंचायत बिलहड़ी के आश्रय स्थल पर भरे दलदल में खड़े गोवंश। संवाद
फोटो 04 एचएएमपी 15- ग्राम पंचायत बिलहड़ी के आश्रय स्थल पर भरे दलदल में खड़े गोवंश। संवाद