महोबा। जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत जिले में 60 फीसदी से ज्यादा अन्ना पशुओं को गोशालाओं में भेजने के बाद भी कई गावों में घूम रहे अन्ना पशुओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात ये हैं कि अब किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए दिन-रात फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। तमाम किसानों ने खेतों में परिवार के साथ डेरा जमा लिया है। अब दिन रात खेतों में लेटकर रखवाली कर रहे हैं।
गौरतलब है कि बुंदेलखंड में अन्ना जानवरों की भरमार है। अन्ना पशुओं के डर से और पानी की समस्या को देखते हुए जिले में किसानों ने 20 फीसदी रबी की फसल की बुवाई की है। उसे भी अन्ना पशुओं से बचाना मुश्किल हो गया है। हालांकि जिलाधिकारी सहदेव के निर्देश पर अभियान चलाकर जिले में बनाई गई अस्थायी 85 गोशाओं में पचास फीसदी से ज्यादा पशुओं भेज दिया है लेकिन शेष घूम रही गायों की व्यवस्था करने के ग्राम प्रधानों को निर्देश दिए हैं। लेकिन ज्यादातर प्रधान रुचि नहीं दिखा रहे हैं, जिससे किसान कई स्थानों पर स्वयं पशुबाड़े बनाकर पशुओं को खोलने और रोज बंद कर रहे हैं।
अब पशुओं से फसल बचाने के लिए किसानों ने घर द्वार छोड़कर ठंड के मौसम में बीच खेतों में चारपाई डालकर फसलों की रक्षा करना शुरू कर दी है। बारी-बारी से परिवार के लोग फसलों की रक्षा कर रहे हैं। किसान द्वारा बोई गई थोड़ी बहुत फसल को बचाने के लिए वह रात दिन मेहनत कर रहा है। इसके बाद भी कई किसानों की फसल अन्ना पशु मौका पाकर चट कर गए हैं।
श्रीनगर क्षेत्र में नहीं खुली एक भी गोशाला
श्रीनगर (महोबा)। श्रीनगर क्षेत्र में एक भी गोशालाएं न बनाए जाने से अन्ना पशुओं की भरमार है। आएदिन सड़कों पर अन्ना पशुओं से टकराकर बाइक सवार चुटहिल हो जाते हैं। खेतों के आसपास घूम रहे अन्ना पशुओं ने किसानों को मुश्किल में डाल दिया है। थोड़ी सी नजर चूकने पर खेत के खेत चट कर देते हैं। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में अस्थायी गोशालाओं को संचालित करने के निर्देश दिए थे लेकिन श्रीनगर क्षेत्र में अस्थायी गोशालाएं न बनने से अन्ना जानवरों से फसले बचाना मुश्किल हो रहा है। श्रीनगर प्रधान प्रतिनिधि अमित दीक्षित का कहना है कि भैरवगंज मोहल्ले में ग्राम समाज की भूमि पर प्रस्ताव सीडीओ दिया था लेकिन विभाग द्वारा गोशाला बनाए जाने के लिए बजट नहीं दिया गया।