हमीरपुर। परीक्षाफल वितरण के साथ ही पहली अप्रैल से नई कक्षाओं में प्रवेश शुरू हो गए हैं। अभिभावकों ने कापी-किताबों की खरीदारी शुरू कर दी है। नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी से लेकर 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले अभिभावक कापी-किताबें खरीदने के लिए स्टेशनरी की दुकानों में पहुंचने लगे हैं। कापी-किताबों का सेट 1000, 1200, 1500 से लेकर 2500 रुपये तक पड़ रहा है। वहीं बीते साल की तुलना में कापी किताबों के दाम करीब बीस फीसदी बढ़ गए हैं। जिसे दुकानदार कागज के बढ़ने के हवाला दे रहे हैं। जबकि स्कूलों ने कमीशन का खेल शुरु कर दिया हैै। जिसको लेकर अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
कापी किताबों के विक्रेता अमित गुप्ता का कहना है कि कागज के दाम बढ़ने से इस बार कापी-किताबों के दाम बीस फीसदी तक बढ़ गए हैं। इस कारण नए शिक्षा सत्र में अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है। हर माह मोटी फीस देने का बोझ तो सभी अभिभावकों पर सालभर रहता ही है। इससे सीमित आय वाले परिवारों का बजट गड़बड़ा सकता है।
क्या बोले अभिभावक
-कापी-किताबों के दामों में बढ़ोतरी परेशानी हो रही है। मघ्यम वर्गीय परिवार में जिनके दो-तीन बच्चे हैं उनके लिए प्रवेश शुल्क, कापी-किताबों, ड्रेस सहित अन्य वस्तुओं की खरीदारी करना आसान नहीं है। स्कूल वाले कमीशन का खेल खेल रहे हैं। -विनय, अभिभावक।
कापी-किताब महंगे होने से सीमित आय वाले परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।कागज का मूल्य बढ़ाने के बजाय सरकार को इसमें कमी करनी चाहिए ताकि कापी-किताब सस्ते हो सकें। - राजेश निषाद, अभिभावक