सूखने की कगार में पहुंच चुका सरीला कस्बे का गुरखुरु तालाब।
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सरीला (हमीरपुर)। बुंदेलखंड में पड़े सूखे की वजह से तालाबों का पानी भी सूख गया। इससे तालाबों में मछलियां मछलियां मर गईं। मछलियां मरने से सबसे ज्यादा नुकसान मछली पालकों को हुआ है। मछली पालकों ने ठेकों में तालाब लिए थे। मछलियां मरने की वजह से उसकी लागत तक नहीं निकल पाई है। अब मछली का कारोबार करने वाले सरकारी मदद के लिए भटक रहे हैं।
कस्बे के परमलाल बताते हैं कि उन्होंने नगर पंचायत से 2013 में गुरखुरु तालाब में मछली पालन का ठेका पांच साल के लिए 10.25 लाख रुपये में लिया था। डेढ़ लाख का बीज भी डाला था। इस बार सिर्फ 25 हजार रुपये की ही मछलियां बिक पाई हैं। ठेके की रकम भी तीन किस्तों में 6.40 लाख जमा कर चुके हैं। उसका कहना है कि नगर पंचायत ने प्राकृतिक आपदा पर राहत देने की बात कही थी लेकिन लगातार सूखे से वह तबाह हो गया है। तालाब का पानी सूखने से मछलियां तड़प-तड़प कर मर गईं हैं। उसे करीब 16 लाख का नुकसान हुआ है। बाकी रकम माफ करने के लिए अफसरों की चौखट के चक्कर लगा रहे हैं।
कस्बे के ही प्रेमनारायन धुरिया ने बताया कि सूखे ने उसे तबाह कर दिया है। 2013 में उसने नगर पंचायत से मछली पालन के लिए मेहेर तालाब 1.60 लाख तथा रमकुंडा गड्ढा का ठेका 22 हजार 500 रुपये में पांच साल के लिए लिया था जिसमें 40 हजार रुपये जमा भी कर दिए हैं। दोनों तालाबों में 95 हजार का बीज डाला था। अभी तक मात्र 20 हजार रुपये की वापसी हो पाई है। तालाब सूखे तो मछलियां मर गईं। बताया कि उसने तीन निजी तालाब भी ढाई लाख रुपये में मछली पालने के लिए थे। उनमें भी 1.10 लाख रुपये का बीज डाला। ठेके की आधी रकम भी दे दी है लेकिन उन तालाबों में धूल उड़ रही है। इससे वह बर्बाद हो गया है। सरकारी मदद भी नहीं मिल रही है। उसने किसानों की तरह प्राकृतिक आपदा राहत देने की गुहार लगाई है लेकिन आज तक किसी ने सुनी नहीं है।