ओलावृष्टि, अतिवृष्टि व सूखा जैसी मार से जूझ रहे किसान अब अन्ना पशुओं से अपनी फसल नहीं बचा पा रहे हैं। इस साल ठीकठाक बारिश होने से किसानों को अच्छी फ सल की उम्मीद जागी है। लेकिन अन्ना जानवरों के चलते किसानों की रही सही उम्मीद पर पानी फिरता नजर आ रहा है। अन्ना मवेशियों से परेशान किसानों ने शुक्रवार से पाथादेवी मंदिर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। किसानों ने समस्या का हल न निकलने पर विधानसभा चुनाव का विरोध करने की चेतावनी भी दी है।
दो सप्ताह पहले प्रधान ने अन्ना मवेशियों के लिए चिलेहटा जंगल में करीब 250 जानवरों को तारबाड़ी कराकर बंद कराया था। यह सूचना जैसे ही क्षेत्र में फैली कि बिवांर प्रधान ने जंगल में गोशाला बनवाई है। आसपास के बांधुरखुर्द व बाधुर बुजुर्ग, लोधामऊ, भटरा, चिल्ली, सायर, निवादा, उमरी, भरखरी आदि गांवों के किसानों ने हजारों की तादाद में अन्ना जानवर लाकर छोड़ दिए। जिससे सारी व्यवस्था चौपट हो गई और जंगल के किनारे से लगी सैकड़ों बीघा की फ सल अन्ना जानवर चट कर गए।
इसी को लेकर कस्बा के सैकड़ों लोगों ने शुक्रवार को पाथादेवी मंदिर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। किसानों का कहना है कि ऐसी कड़ाके की ठंड व घने कोहरे में वह रात भर खेतों की रखवाली करते हैं और जरा सी चूक होने पर उनकी फ सलें चौपट हो जातीं हैं। शासन-प्रशासन कोई भी मदद नहीं कर रहा है। जब तक उनकी समस्या का हल नहीं निकलता। वह अनशन में बैठे रहेंगे। प्रधान प्रतिनिधि रमेश सिंह भदौरिया ने बताया कि किसानों ने इस समस्या के निदान को मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है।
जिसमें कहा है कि अगर किसानों की इस समस्या का हल नहीं निकाला जाता, तो आगामी विधानसभा चुनावों का क्षेत्र के सभी किसान व्यापक विरोध करेंगे। धरने पर किसान नेता महेश तिवारी, हरवंश सिंह, बृजकिशोर पाठक, प्रकाश नारायण, सत्येंद्र सिंह, जानकी यादव, हुनर सिंह यादव, राजाराम कुशवाहा, लल्लू यादव, देवदत्त, शिव शंकर तिवारी, पिंटू पाठक, अहमद, वहीद आदि सहित सैकड़ों किसान धरने पर मौजूद रहे।